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बरेली में दिखा कानपुर हिंसा का असर, धारा-144 लागू, जुलूस-जलसों व धरना-प्रदर्शन पर रहेगी रोक

शुक्रवार को कानपुर में हिंसा ने जिस तरह कि रूप लिया वह दुर्भाग्यपूर्ण था। ख़ौफ़नाक इस लिए भी था कि उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लखनऊ और राष्ट्रपति कानपुर पहुँच रहे थे।

By प्रिया सिंह 
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उत्तर प्रदेश|शुक्रवार को कानपुर में हिंसा ने जिस तरह कि रूप लिया वह दुर्भाग्यपूर्ण था। ख़ौफ़नाक इस लिए भी था कि उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लखनऊ और राष्ट्रपति कानपुर पहुँच रहे थे। हिंसे की पूरी प्लानिंग की गयी लेकिन अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। जिसको लेकर प्रशासन की जमकर किरकिरी हुई।

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इस घटना से सिख लेते हुए अन्य जनपदों के अधिकारी अलर्ट मोड पर हैं। इसी क्रम में बरेली के अधिकारी भी सतर्क हो गए हैं। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा व बकरीद की परिस्थितियों में आसामाजिक तत्वों द्वारा ऐसी अवांछनीय गतिविधियों को किए जाने की आशंका है, जिससे लोक शांति भंग हो सकती है। इसके चलते जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने जिले में निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

जिले में धारा 144 लागू होने के बाद से किसी भी सार्वजनिक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोग एकत्रित नहीं हो सकेंगे। किसी भी सार्वजनिक स्थान पर जनसभा, जलसा या जुलूस व धरना-प्रदर्शन बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के नहीं हो सकेगा। कोई भी व्यक्ति विस्फोटक सामग्री या फिर तेजाब नहीं ले जा सकेगा। लाउडस्पीकर, डैक या अन्य कोई ऐसी ध्वनि विस्तारक यंत्र सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति से बजा पाएगा। कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का हथियार लेकर सार्वजनिक स्थान या मार्ग पर नहीं चल सकेगा।

परीक्षा के दौरान केंद्रों से दो सौ मीटर की परिधि में फोटो स्टेट, कोरियर, कंप्यूटर की दुकानें परीक्षा के दौरान बंद रहेंगी। सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, धार्मिक उन्माद बढ़ाने वालों पर कार्रवाई होगी। जिलाधिकारी के अनुसार जिले में निषेधाज्ञा तीन जुलाई तक लागू रहेगी। इसका उल्लंघन करने वालों पर धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि इस बीच शहर में ताजुश्शरिया का दो रोजा उर्स होना है और इत्तेहाद ए मिल्लत कौंसिल (आइएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने दस जून को इस्लामियां मैदान पर धरना-प्रदर्शन का अल्टीमेटम दिया है।

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