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महिला आरक्षण बिल के साथ संसद में होनी चाहिए ओबीसी प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर भी चर्चा- वरिष्ठ नेता वी. हनुमंत राव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. हनुमंत राव ने शुक्रवार को कहा कि 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले होने वाली पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के साथ-साथ OBC प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श होना चाहिए। राव ने कहा कि आने वाला संसदीय सत्र बहुत महत्वपूर्ण होगा।

By Satish Singh 
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नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. हनुमंत राव ने शुक्रवार को कहा कि 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले होने वाली पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के साथ-साथ OBC प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श होना चाहिए। राव ने कहा कि आने वाला संसदीय सत्र बहुत महत्वपूर्ण होगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी संसद में एक मजबूत रुख अपनाने का आग्रह किया। हनुमंत राव ने कहा कि संसद सत्र में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा करेंगे। CWC भी एक बैठक करेगी। इस बैठक में ओबीसी मुद्दे पर भी चर्चा होनी चाहिए। CWC की इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल गांधी से मेरा अनुरोध है कि वे संसद में इस मुद्दे पर संघर्ष करें।

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हनुमंत राव ने तर्क दिया कि महिला आरक्षण के कार्यान्वयन में हाशिए पर पड़े और पिछड़े समुदायों की महिलाओं के प्रतिनिधित्व को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होने चेतावनी देते हुए कहा कि इसका लाभ उच्च वर्ग की महिलाओं को ही अधिक मिल सकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ-साथ SC और ST के प्रतिनिधित्व पर भी चर्चा होगी। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को भी संसद और विधानसभाओं में जगह मिलनी चाहिए। उनका भी इसमें हिस्सा होना चाहिए। राव ने यह भी कहा कि OBC महिलाएं प्रस्तावित ढांचे में शामिल किए जाने और उचित प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि OBC महिलाएं भी धरना दे रही हैं, इसलिए उन्हें OBC के वर्गीकरण को गंभीरता से लेना चाहिए, ताकि उन्हें भी विधानसभा और संसद में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर अवसर मिल सके। यदि यह बिल OBC के बिना ही पारित हो जाता है, तो इससे हर OBC समुदाय को नुकसान पहुंचेगा। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद डी.के. अरुणा ने कहा कि 2023 में व्यापक सहमति से पारित महिला आरक्षण कानून को अब बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए और सभी राजनीतिक दलों द्वारा इसका समर्थन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल, जिसे 2023 में सभी सांसदों की सहमति से संसद में पारित किया गया था, अब लागू किए जाने की आवश्यकता है। आगामी 2029 के चुनावों के लिए इस बिल को अमल में लाने और सभी दलों और सांसदों की सहमति प्राप्त करने के उद्देश्य से संसदीय सत्र निर्धारित किया गया है।

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