नोएडा के जिला अस्पताल (Noida District Hospital) में स्वास्थ्य व्यवस्था (State of Healthcare) की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के लिए 60,000 ऐसी सिरिंज का ऑर्डर दे दिया जो जानवरों (Veterinary) के लिए इस्तेमाल होती हैं। फार्मासिस्ट से लेकर सीएमएस (CMS) तक की फाइल चेकिंग के बाद भी यह गलती नहीं पकड़ी गई। जानिए जेम पोर्टल से हुए इस ऑर्डर और सप्लाई आने पर खुलासा हुआ है।
नोएडा। नोएडा के जिला अस्पताल (Noida District Hospital) में स्वास्थ्य व्यवस्था (State of Healthcare) की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के लिए 60,000 ऐसी सिरिंज का ऑर्डर दे दिया जो जानवरों (Veterinary) के लिए इस्तेमाल होती हैं। फार्मासिस्ट से लेकर सीएमएस (CMS) तक की फाइल चेकिंग के बाद भी यह गलती नहीं पकड़ी गई। जानिए जेम पोर्टल से हुए इस ऑर्डर और सप्लाई आने पर खुलासा हुआ है।

इस खबर को एक्स पोस्ट पर शेयर करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (National President Akhilesh Yadav) ने लिखा कि इसकी एक सुई स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) को लगवा दी जाए तो शायद उनकी तबियत सुधर जाए। उन्होंने लिखा कि भाजपा इंसान को इंसान कहां समझती है इसीलिए तो नोएडा के ज़िला अस्पताल में इंसानों के लिए जानवरों की सिरिंज मंगा ली। शायद इसमें कमीशन ज़्यादा मिल रहा होगा। अखिलेश यादव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री छुट्टी पर हैं या उनकी छुट्टी हो गयी है। उन्होंने कहा कि इस लापरवाही की सघन जांच हो, घोर निंदनीय।
ऑर्डर में बड़ी चूक
बता दें कि लापरवाही का आलम यह है कि ऑर्डर तीन स्तरों के अधिकारियों की निगरानी से गुजरने के बावजूद किसी ने भी अंतर नहीं पहचाना। जानकारी के मुताबिक, 25 दिसंबर 2025 को नोएडा जिला अस्पताल प्रशासन ने जीकेएम/जेम पोर्टल के माध्यम से 60,000 वेटरनरी सिरिंज लखनऊ की एक एजेंसी को ऑर्डर किया। लगभग एक महीने बाद सप्लाई पहुंची तो स्टोर रूम में बॉक्स खोलने पर स्पष्ट हुआ कि यह सिरिंज इंसानों के लिए नहीं, बल्कि पशुओं के लिए थी। इस चौंकाने वाली गलती ने अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर कर दी।
तीन स्तरों की निगरानी में भी कोई नहीं देखा
अस्पताल में दवाइयों और उपकरणों की मांग फार्मासिस्ट से शुरू होकर एसएमओ स्टोर और फिर सीएमएस तक जाती है। इस प्रक्रिया में तीन बड़े अधिकारियों की मेज से फाइल गुज़री, लेकिन किसी ने यह नहीं देखा कि ऑर्डर इंसानों के लिए है या जानवरों के लिए।
सीएमएस डॉ. अजय राणा ने कहा कि गलती एजेंसी की है और उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। यदि स्टाफ की गलती होगी तो उसकी भी जांच कराई जाएगी। हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि जब ऑर्डर अस्पताल से जारी हुआ और सिस्टम में दर्ज हुआ, तो पूरी जिम्मेदारी केवल एजेंसी पर कैसे आ सकती है?
सप्लाई रद्द और एजेंसी पर कार्रवाई
जेम ऐप पर भेजे गए ऑर्डर में स्पष्ट लिखा गया था कि यह वेटरनरी सिरिंज है। मामला सामने आने के बाद अस्पताल ने सप्लाई को रद्द कर दिया और एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार इस बड़ी फजीहत को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और अधिकारी अभी तक खुलकर जवाब नहीं दे रहे हैं।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
25 दिसंबर 2025 को जिला अस्पताल ने जेम/जीकेएम पोर्टल के माध्यम से 60,000 वेटरनरी सिरिंज का ऑर्डर भेजा। सप्लाई लगभग एक महीने बाद अस्पताल पहुंची। स्टोर रूम में बॉक्स खोलने पर स्पष्ट रूप से ‘पशु चिकित्सा उपयोग के लिए’ लिखा पाया गया। मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने ऑर्डर को रद्द कर दिया और एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी की।