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चीतों और बाघों की संख्या बढ़ी लेकिन भोजन का संकट खड़ा हुआ

प्रदेश में चीतों के साथ ही बाघों की संख्या में बढ़ोतरी होने से भले ही वन विभागीय अफसर खुश हो लेकिन इन जीवों के लिए फिलहाल भोजन का संकट खड़ा हो गया है।

By Shital Kumar 
Updated Date

भोपाल। प्रदेश में चीतों के साथ ही बाघों की संख्या में बढ़ोतरी होने से भले ही वन विभागीय अफसर खुश हो लेकिन इन जीवों के लिए फिलहाल भोजन का संकट खड़ा हो गया है। बताया गया है कि फिलहाल वन विभाग के अफसर भोजन का प्रबंधन करने के लिए कवायद में जुटे हुए है।

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बताया यह भी गया है कि अभी तक कूनो में दूसरे वन अभ्यारणों से पकडक़र चीतलों के अलावा अन्य वन्य प्राणियों को भेज कर भोजन की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन जिस तरह से दूसरे अभ्यारणों में बाघों की संख्या में वृद्वि हो रही है उसे देखते हुए वहां पर भी भोजन की प्र्याप्त व्यवस्था होना जरुरी है। यही वजह है कि अब वन विभाग द्वारा श्योपुर के कूनो अभ्यारण में चीतलों की संख्या में प्र्याप्त वृद्धि के लिए उनके प्रजनन पर फोकस किया जा रहा है।

 

चीते आसपास के रहवासी क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं

इसके लिए कूनो क्षेत्र के बागचा गांव में 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चीतल का ब्रीडिंग एन्क्लोजर (प्रजनन के लिए बाड़ा) तैयार किया जा रहा है। फिलहाल इसके निर्माण का काम तेजी से किया जा रहा है। दरअसल, कूनो पार्क में में इस समय 26 चीते हैं, जिनमें से 17 चीते इस समय जंगल में घूम रहे हैं। जंगल में प्र्याप्त भोजन की व्यवस्था नहीं हो पाने की वजह से वे आसपास के रहवासी क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। बीते एक पखवाड़े में दो बार चीतों द्वारा रहवासी इलाकों में जाकर बकरियों का शिकार किया जा चुका है। ऐसे में, चीतों की जान पर खतरा मंडराता रहता है। हाल ही में ज्वाला नामक चीता अपने चार शावकों के साथ विजयपुर स्थित श्यामपुर गांव के आसपास डेरा जमाए हुए है। उसने दो दिन पहले शुक्रवार को खेत में बंधी छह बकरियों का शिकार किया। इससे कुछ दिन पहले भी एक गांव में बछड़े का शिकार करने का प्रयास किया गया था, तब ग्रामीणों द्वारा पथराव करने पर चीते भाग गए।

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