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10 साल में डॉलर और सोना की बढ़ती गई चमक, मोदी राज में लगातार कमजोर होता गया रुपया… कौन देगा जवाब?

'बहुत हुई मंहगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार' के नारे के साथ भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में आम चुनाव जीता था। देश की जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्तारूढ़ होते ही उम्मीद जगी थी कि मंहगाई से राहत मिलेगी, लेकिन सरकार के 10 साल के कार्यकाल पूरा होने को है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। ‘बहुत हुई मंहगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार’ के नारे के साथ भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में आम चुनाव जीता था। देश की जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्तारूढ़ होते ही उम्मीद जगी थी कि मंहगाई से राहत मिलेगी, लेकिन सरकार के 10 साल के कार्यकाल पूरा होने को है। लोकसभा चुनाव 2024 का बिगुल भी बज चुका है, लेकिन देश की आर्थिक आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो पीएम मोदी के सारे दावे हवा-हवाई की साबित हुए हैं।

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जब बीजेपी ने 2014 में आम चुनाव जीता, तो भारतीय रुपये की विनिमय दर एक डॉलर के मुकाबले 58.66 रुपये थी इसके बाद से, रुपये के मूल्य में लगातार गिरावट आई है और आज 1 डॉलर के मुकाबले 83.48 रुपये तक पहुंच गया है। भारतीय रुपये का मूल्य धीरे-धीरे कम हो गया और अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

बतातें चलें कि नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे। तब अक्सर चुनावी सभाओं और देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह हमला बोलते हुए तंज कसते थे। कहा करते थे कि जब रुपया गिरता है तो भारत की प्रतिष्ठा कम होती है। इसके साथ ही नरेंद्र मोदी ने रुपये के मूल्य को राष्ट्रीय गौरव से भी जोड़ा था। कहते थे कि यूपीए सरकार और रुपये के अवमूल्यन के बीच प्रतिस्पर्धा थी कि कौन तेजी से गिर सकता है?
अब रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिर गया है, क्या अब देश की साख नहीं गिर रही है? प्रधानमंत्री मोदी इन मुद्दों का समाधान करने को तैयार नहीं हैं जिनका देश इस समय सामना कर रहा है।

भारतीय रुपये के अवमूल्यन से आयात महंगा होता जा रहा है। इसमें खनिज ईंधन, तेल, विद्युत मशीनरी, परमाणु रिएक्टर, यांत्रिक उपकरण, आभूषण और बहुत कुछ शामिल हैं। चूंकि ये सभी आयात डॉलर में होते हैं, इसलिए डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा के कमजोर होने का असर इन क्षेत्रों पर पड़ रहा है। अब, यह आम आदमी पर दोहरा बोझ है क्योंकि देश उच्च मुद्रास्फीति से गुजर रहा है और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें हर दिन तेजी से बढ़ रही हैं। रुपये के मूल्यह्रास के परिणामस्वरूप स्थानीय कीमतों पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। घरेलू ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे परिवहन लागत में वृद्धि के परिणामस्वरूप अन्य आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ीं हैं।

मोदी सरकार का पहला कार्यकाल मई 2014 से शुरू हुआ। नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। उस वक्त देश में फिजिकल गोल्ड की कीमत 27000-28000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच थी। अगर गोल्ड फ्यूचर्स पर नजर डालें तो मई 2014 में कीमत 26863 रुपये प्रति 10 ग्राम पर थी।

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भारतीय सर्राफा बाजार में आज, 12 अप्रैल, 2024 को भी सोना और चांदी दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। सोने की कीमत 72 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पार है। वहीं, चांदी का भाव 83 हजार रुपये प्रति किलो से अधिक है। राष्ट्रीय स्तर पर 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत 72967 है। जबकि 999 शुद्धता वाली चांदी (Silver) की कीमत 83605 रुपये है।

विपक्ष का दावा है कि रुपये की लगातार गिरावट को रोकने में असमर्थता के कारण मोदी सरकार अपनी विश्वसनीयता खो रही है। अब रुपया और कितना गिरेगा? और कितनी गिरेगी सरकार की साख? मोदी सरकार कब तक झूठ और फरेब की आड़ में छिपती रहेगी, जबकि देश का मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रहती है कि मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था जर्जर है। आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों ने आम जनता की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। लोगों को आय में कमी के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई के कारण समाज के सभी वर्ग प्रभावित हैं और निम्न मध्यम वर्ग के लिए अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करना बहुत मुश्किल हो गया है।

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