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योगी सरकार नमामि गंगे योजना से बदलेगी गोमती नदी की तस्वीर, नालों की टैपिंग से एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा सीवेज

By santosh singh 
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लखनऊ। योगी सरकार (Yogi Government)  प्रदेश में नदियों को प्रदूषण को दर करने के लिए जोर-शोर से काम कर ही है। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ में गोमती नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। शहर से निकलने वाले सीवेज को सीधे गोमती में पहुंचने से रोकने के लिए नालों की टैपिंग, फ्लो डायवर्जन, एसटीपी की क्षमता बढ़ाने और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (New Sewage Treatment Plant) स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। ड्रोन सर्वे के बाद गोमती में गिरने वाले 45 नालों की पहचान हुई है। अब इन नालों के जरिए नदी में पहुंच रहे सीवेज का शोधन सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग एसटीपी से जोड़ने की योजना पर काम हो रहा है।

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45.56 लाख आबादी, 7.52 लाख घर

वर्ष 2026 में लखनऊ नगर की अनुमानित आबादी करीब 45.56 लाख है। शहर में कुल 110 वार्ड हैं और करीब 7.52 लाख घर हैं। इनमें से लगभग 4.01 लाख यानी 53.32 प्रतिशत घर सीवरेज नेटवर्क से जुड़े हैं। ऐसे में सीवरेज नेटवर्क का विस्तार और नालों के जरिए गोमती में पहुंच रहे प्रदूषित पानी को रोकना नदी संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती है।

आंकड़ों के अनुसार लखनऊ में आबादी के सापेक्ष करीब 546.77 एमएलडी घरेलू सीवेज (गंदा और अपशिष्ट जल) उत्पन्न होता है, जबकि वास्तविक डिस्चार्ज करीब 880.70 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) है। इसमें 690.33 एमएलडी सीवेज नालों के माध्यम से और 190.71 एमएलडी सीवर नेटवर्क के जरिए प्रवाहित होता है।

राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन (State Drinking Water and Sanitation Mission) के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह (Executive Director Joginder Singh) ने बताया कि नदियों को स्वच्छ बनाना हमारी प्राथमिकता है। विभाग ने नए नालों की पहचान की है, जिन्हें जल्द शोधित किया जाएगा। इससे शहर के बड़े हिस्से से गुजरने वाली गोमती नदी का स्वरूप बदलेगा।

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10 एसटीपी, 629.5 एमएलडी शोधन क्षमता

शहर में उत्पन्न सीवेज के शोधन के लिए कुल 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित हैं। इनकी कुल शोधन क्षमता करीब 629.5 एमएलडी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वास्तविक डिस्चार्ज और मौजूदा शोधन क्षमता के बीच अंतर बना हुआ है। ऐसे में गोमती में सीधे पहुंचने वाले सीवेज को रोकने के साथ ही शोधन क्षमता को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करना जरूरी है।

ड्रोन सर्वे में 12 नए नाले मिले

लखनऊ में गोमती नदी करीब 30 किलोमीटर की लंबाई में प्रवाहित होती है। नगर निगम के रिकॉर्ड में गोमती में गिरने वाले 33 नालों का उल्लेख था। ड्रोन सर्वे के बाद 12 नए नाले चिह्नित किए गए। इस तरह गोमती में गिरने वाले कुल 45 नालों का विवरण सामने आया है। 45 नालों में से 12 से लगभग 75 एमएलडी डिस्चार्ज टैप किया जा चुका है। 5 नालों में टैपिंग की आवश्यकता नहीं पाई गई। अवशेष 28 नालों (अनटैप्ड एवं आंशिक टैप्ड) का डिस्चार्ज लगभग 260 एमएलडी है।

39 एमएलडी एसटीपी का निर्माण पूरा

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नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 39 एमएलडी एसटीपी का निर्माण कार्य 4 नवंबर 2024 को पूरा किया गया था। इसके बाद 5 नवंबर 2024 से एसटीपी के अनुरक्षण एवं संचालन का कार्य जारी है। इसके अलावा एक अनटैप्ड नाले को टैप कर 3.5 एमएलडी बरीकलां एसटीपी में शोधित करने की योजना पर काम चल रहा है। इस परियोजना को अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

इसी क्रम में दो अनटैप्ड नालों और एक आंशिक टैप्ड को टैप कर 50 एमएलडी लोनियापुरवा एसटीपी से जोड़कर सीवेज शोधन कराने की योजना निर्माणाधीन है। इस परियोजना को जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

160, 150, 65 और 65 एमएलडी सीवेज होगा डायवर्ट

गोमती के पुनरुद्धार के लिए तैयार प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (पीएफआर) में नालों को अलग-अलग एसटीपी से जोड़कर सीवेज शोधन कराने का प्रस्ताव है। इसके तहत अवशेष 28 नालों (अनटैप्ड एवं आंशिक टैप्ड) को टैप किए जाने के लिए 160 एमएलडी बसंतकुंज, 65 एमएलडी वजीरगंज, 150 एमएलडी जियामऊ, 65 एमएलडी नीलमथा में एसटीपी निर्माण, मस्तेमऊ नाले पर नेचर बेस्ड तकनीक, पीपराघाट में 750 केएलडी और घैला में 100 केएलडी क्षमता के मॉड्यूलर एसटीपी के माध्यम से शोधन के लिए कार्य योजना चल रही है। इसके साथ ही भरवारा एसटीपी के अपग्रेडेशन और उससे जुड़े 19 नालों की आवश्यक मरम्मत और दौलतगंज एसटीपी के अपग्रेडेशन के साथ उससे जुड़े दो नालों की आवश्यक मरम्मत का काम भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है।

एनएमसीजी को भेजी जा चुकी है रिपोर्ट

गोमती नदी के समेकित पुनरुद्धार की इस कार्ययोजना की रिपोर्ट 6 मई 2026 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) नई दिल्ली को भेजी जा चुकी है। प्रस्तावित कार्यों के क्रियान्वयन के बाद ओवरफ्लो हो रहे और अनटैप्ड नालों को टैप करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।

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