यूपी विधानसभा चुनाव 2027 (UP Assembly Elections 2027) की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर नए और पुराने चेहरों की सरगर्मियां अचानक बढ़ गई हैं। बीते कुछ दिनों से सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से बीजेपी के कई पुराने चेहरे मिल रहे हैं। इसी कड़ी में योगी सरकार (Yogi Government) के पहले कार्यकाल में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहीं स्वाति सिंह ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से विशेष मुलाकात की है।
लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 (UP Assembly Elections 2027) की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर नए और पुराने चेहरों की सरगर्मियां अचानक बढ़ गई हैं। बीते कुछ दिनों से सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से बीजेपी के कई पुराने चेहरे मिल रहे हैं। इसी कड़ी में योगी सरकार (Yogi Government) के पहले कार्यकाल में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहीं स्वाति सिंह ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से विशेष मुलाकात की है। 2022 के विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद राजनीतिक पटल से लगभग दूरी बना चुकीं स्वाति सिंह की सीएम योगी के साथ हुई इस शिष्टाचार भेंट ने सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज कर दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या बीजेपी 2027 के चुनाव में स्वाति सिंह को फिर से लखनऊ के सरोजनी नगर सीट या बलिया के किसी सीट से चुनावी मैदान में उतारने का खाका तैयार कर रही है?
मंत्री दयाशंकर सिंह (Minister Dayashankar Singh) की पत्नी रहीं स्वाति सिंह का राजनीति में उभार परिस्थितियों की देन था। साल 2016 में स्वाति सिंह के पति और बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह (Dayashankar Singh) ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती (BSP Supremo Mayawati) पर एक विवादित बयान दे दिया था। इसके जवाब में बीएसपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान दयाशंकर सिंह (Minister Dayashankar Singh) की मां और बेटी को लेकर बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। तब स्वाति सिंह ने खुलकर सामने आकर अपनी सास और बेटी के सम्मान की लड़ाई लड़ी और बीएसपी नेताओं को कड़ी चुनौती दी। उनके इस तेवर ने उन्हें रातों-रात मीडिया और सार्वजनिक पटल पर पहचान दिला दी।
विवाद, पति से दूरियां और 2022 में टिकट कटने की कहानी
बीजेपी ने बाद में स्वाति सिंह को महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। इसके बाद उन्हें 2017 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ की सरोजनी नगर सीट से टिकट दिया। उन्होंने जीत हासिल की और योगी सरकार के पहले कार्यकाल में बाल विकास एवं महिला कल्याण मंत्री बनीं। इस दौरान उनके पति दयाशंकर सिंह और उनके बीच विवाद काफी सुर्खियां बटोरा। मंत्री बनने के बाद स्वाति सिंह कई प्रशासनिक व व्यक्तिगत विवादों से घिरी रहीं। 2022 के चुनाव आते-आते स्वाति सिंह और उनके पति दयाशंकर सिंह के रिश्ते खट्टे हो चुके थे और दोनों अलग रहने लगे थे।
सरोजनी नगर सीट पर कितने दावेदार?
2022 के विधानसभा चुनाव में सरोजनी नगर सीट से स्वाति सिंह और दयाशंकर सिंह दोनों ने ही अपनी-अपनी दावेदारी ठोक दी। पति-पत्नी की इस लड़ाई से उपजे गतिरोध को खत्म करने के लिए बीजेपी आलाकमान ने सरोजनी नगर से दोनों का ही टिकट काट दिया। पार्टी ने ईडी के पूर्व जॉइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह को उम्मीदवार बनाया, जो भारी मतों से जीतकर विधायक बने। वहीं, पार्टी ने दयाशंकर सिंह को बलिया सीट से प्रत्याशी बनाया, जहां से जीतकर वे वर्तमान योगी सरकार में परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने हुए हैं।
सीएम योगी से मुलाकात के क्या हैं सियासी मायने?
027 के चुनाव से ठीक पहले स्वाति सिंह की मुख्यमंत्री आवास पर हुई यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं मानी जा रही है। संसद से पास नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बाद बीजेपी 2027 चुनाव में महिला चेहरों को प्रमुखता देने जा रही है। स्वाति एक सशक्त महिला वक्ता रही हैं। इसके साथ ही ठाकुर वोट बैंक का समीकरण भी बहुत बड़ा फैक्टर है। अवध और पूर्वांचल के इलाकों में राजपूत-ठाकुर समीकरणों को साधे रखने के लिए पार्टी स्वाति सिंह जैसे जाने-पहचाने चेहरे को फिर से एक्टिव करना चाहती है।
नया ठिकाना या विधान परिषद?
चूंकि सरोजनी नगर सीट पर राजेश्वर सिंह मजबूत पकड़ बना चुके हैं, इसलिए स्वाति सिंह को किसी अन्य सीट जैसे लखनऊ की दूसरी सीट या पूर्वांचल के किसी जिले से उतारा जा सकता है या विधान परिषद भेजे जाने की चर्चा जोड़ पकड़ रही है। क्योंकि दयाशंकर सिंह भी सीएम योगी के साथ नजदीकी है। ऐसे में पति-पत्नी में किसी एक को अगर टिकट मिलता है तो दयाशंकर सिंह का पलड़ा भारी लग रहा है। ऐसे में सीएम योगी से यह मुलाकात के लोग मायने तलाश रहे हैं। चर्चा है कि राज्य महिला आय़ोग या एमएलसी में किसी एक पद पर उनका बैठाया जाए।
कुल मिलाकर स्वाति सिंह की सीएम योगी से मुलाकात यह दर्शाती है कि बीजेपी 2027 के महासमर से पहले अपने पुराने निष्ठावान और आक्रामक चेहरों को फिर से मुख्यधारा में लाने का विचार कर रही है। अब देखना यह होगा कि पार्टी उन्हें सरोजनी नगर के विकल्प के रूप में कहां से नया राजनीतिक धरातल देती है या पिछले गेट से एंट्री दिलाती है?