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‘प्रयागराज महाकुंभ’ की सफलता में CM योगी के इन अनमोल रत्नों ने निभाई अहम भूमिका; पढ़ें- इनके बारे में

Heroes of the success of 'Prayagraj Maha Kumbh': संगम नगरी प्रयागराज में 45 दिनों तक चले आस्था के समागम महाकुंभ ने दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। महाकुंभ में सबने सनातन संस्कृति को अपनी आंखों से देखा और इसकी महानता का अनुभव किया। इस पावन अवसर पर धरती के कोने-कोने से ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का साक्षी बनने और आस्था की डुबकी लगाने के लिए 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी तट पर पहुंचे। जिससे पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। हालांकि, इतने बड़े आयोजन को सफल बनाना किसी भी सरकार के लिए आसान काम नहीं था, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और उनके अनमोल रत्नों ने असंभव कार्य को संभव कर दिखाया। आइये, प्रयागराज महाकुंभ की सफलता के नायकों के बारे में जानते हैं-

By Abhimanyu 
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Heroes of the success of ‘Prayagraj Maha Kumbh’: संगम नगरी प्रयागराज में 45 दिनों तक चले आस्था के समागम महाकुंभ ने दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। महाकुंभ में सबने सनातन संस्कृति को अपनी आंखों से देखा और इसकी महानता का अनुभव किया। इस पावन अवसर पर धरती के कोने-कोने से ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का साक्षी बनने और आस्था की डुबकी लगाने के लिए 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी तट पर पहुंचे। जिससे पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। हालांकि, इतने बड़े आयोजन को सफल बनाना किसी भी सरकार के लिए आसान काम नहीं था, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और उनके अनमोल रत्नों ने असंभव कार्य को संभव कर दिखाया। आइये, प्रयागराज महाकुंभ की सफलता के नायकों के बारे में जानते हैं-

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1- मुख्य सचिव मनोज सिंह

प्रयागराज महाकुंभ की सफलता में यूपी के मुख्य सचिव मनोज सिंह का एक बड़ा योगदान रहा। उन्होंने पिछले साल जुलाई में इस पद को संभाला था। जिसके बाद वह प्रयागराज महाकुंभ की तैयारी में जुट गए थे। 1988 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज कुमार सिंह मूल रूप से झारखंड के रांची के रहने वाले हैं। उनका जन्म 25 जुलाई, 1965 को हुआ है।मनोज कुमार की गिनती तेजतर्रार अफसरों में होती है। वे जुलाई 2025 में सेवानिवृत्त होंगे। यूपी का मुख्य सचिव बनने से पहले उनके पास आइआइडीसी, कृषि उत्पादन आयुक्त, अपर मुख्य सचिव पंचायती राज, सीईओ यूपीडा जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी। वे 1990 में सबसे पहले मैनपुरी के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट बने थे। इसके बाद उनको अहम जिम्मेदारियां मिलती रहीं। ललितपुर, गौतमबुद्धनगर, पीलीभीत, मुरादाबाद व अलीगढ़ में डीएम भी रह चुके हैं।

2- डीजीपी प्रशांत कुमार

महाकुंभ में यूपी पुलिस ने अहम रोल अदा किया है। डीजीपी प्रशांत कुमार के पुलिसकर्मियों ने बिना किसी विवाद के संपन्न कराने में सफलता हासिल की है। डीजीपी प्रशांत कुमार 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 16 मई 1965 को बिहार के सीवान में हुआ था। प्रशांत कुमार का चयन तमिलनाडु कैडर में हुआ था। हालांकि निजी कारणों की वजह से साल 1994 में उनका ट्रांसफर यूपी कैडर में हो गया। आईपीएस प्रशांत कुमार को विशेष रूप से अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पहचाना जाता है। उनको तीन बार पुलिस मेडल और 2020 और 2021 में वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के सबसे भरोसेमंद और चहेते अफसरों में से भी एक हैं।

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3- प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद

यूपी के प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद का नाम भी उनकी बड़े अधिकारियों में शामिल है, जिन्होंने प्रयागराज महाकुंभ को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने में अहम भूमिका निभाई। महाकुंभ के शुरू होने से पहले योगी सरकार ने उन्हें गृह, सतर्कता, वीजा और पासपोर्ट जैसे विभाग की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। इससे पहले वह सूचना और प्रोटोकॉल का प्रभार संभाल रहे थे। संजय प्रसाद को सीएम योगी के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में से एक माना जाता है। वह प्रोटोकॉल के प्रभारी के रूप में राज्य के भीतर और बाहर मुख्यमंत्री के दौरों में उनके साथ रहते हैं। संजय प्रसाद 1995 बैच के आईएएस हैं। उनका जन्म 23 मई 1971 को बिहार के सीतामढ़ी में हुआ था। संजय प्रसाद और योगी आदित्‍यनाथ का परिचय गोरखपुर में तब हुआ था। जब योगी आदित्‍यनाथ सांसद हुआ करते थे। उस समय 22 अग्रैल 1999 को संजय प्रसाद गोरखपुर के मुख्‍य विकास अधिकारी बने थे।

4- प्रमुख सचिव (नगर विकास) अमृत अभिजात

प्रयागराज महाकुंभ में भारी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं और स्वच्छता की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन प्रमुख सचिव (नगर विकास) अमृत अभिजात ने इस चुनौती को स्वीकार किया और महाकुंभ को सफल में अहम भूमिका निभाई। अमृत अभिजात उत्तर प्रदेश कैडर के 1995 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। अमृत ​​ने आईएएस के उत्तर प्रदेश कैडर से शुरुआत की। वे अगस्त 1997 में मथुरा में संयुक्त मजिस्ट्रेट, भूमि राजस्व प्रबंधन और जिला प्रशासन में शामिल हुए और उन्नीस महीने तक वहां काम किया। मई 2002 में उन्हें मिर्जापुर का जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) नियुक्त किया गया। बाद में उन्होंने देवरिया, हमीरपुर, इलाहाबाद, झाँसी, मुजफ्फरनगर, कानपुर और आगरा के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में भी कार्य किया। दिसंबर 2015 से श्री अभिजात भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं मिशन निदेशक के पद पर कार्यरत रहे।

5- प्रमुख सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के) मुकेश मेश्राम

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महाकुंभ में रिकॉर्ड 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं को प्रोत्साहित करने में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने अहम भूमिका निभाई। इस दौरान पर्यटन विभाग संगम नगरी प्रयागराज में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को लुभाने के लिए खास इंतजाम किए गए। जिसमें शहर के सौंदर्यीकरण, सड़कों के चौड़ी करण, वाटर लेजर शो और फसाड लाइटिंग समेत कई व्यवस्थाएं की गईं। इसके पीछे पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम का अहम योगदान रहा। 1995 में उन्होंने UPSC की परीक्षा को पास किया और आईएएस बने। मेश्राम का जन्म 26 जून 1967 को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बोरी गांव में हुआ था। उन्होंने 2005 में मऊ जिले के जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया था।

6- सूचना निदेशक शिशिर सिंह

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान अफवाहों और गलत खबरों पर लगाम लगाने में सूचना निदेशक शिशिर सिंह (पीसीएस) ने अहम भूमिका निभाई। इस दौरान सूचना विभाग लोगों को सही जानकारी पहुंचाता रहा। महाकुंभ के भव्य आयोजन को आईएएस अधिकारी शिशिर सिंह ने न केवल प्रदेश तथा देश भर में फैलाया, बल्कि विदेशों तक सनातन संस्कृति की शानदार छवि को प्रचारित किया। यूपी के PCS अधिकारी के रूप में अपना कैरियर शुरू करने वाले शिशिर सिंह जब उत्तर प्रदेश के सूचना निदेशक बनाए गए थे तो किसी ने नहीं सोचा था कि वे अखबारों, टीवी चैनलों तथा सोशल मीडिया के द्वारा उत्तर प्रदेश की शानदान छवि को दुनिया भर में स्थापित कर सकेंगे। इससे पहले पीसीएस अफसर और विशेष सचिव भाषा शिशिर को दिया गया है।

7- प्रमुख सचिव अनिल गर्ग

महाकुंभ में संगम के जल की साफ-सफाई में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग (आईएएस) ने अहम भूमिका निभाई। जिसके चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा सके। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1996 बैच के हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में संयुक्त मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट, विशेष सचिव, ऊर्जा विभाग, लखनऊ, आबकारी आयुक्त कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम किया है।

8- आईएएस विजय किरण आनंद

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भव्य, दिव्य और सुरक्षित महाकुंभ के आयोजन में आईएएस अधिकारी विजय किरण आनंद ने अहम भूमिका निभाई। बेंगलुरू में जन्में विजय किरण आनंद 2009 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। वह एक योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट भी हैं। इन्होंने शुरुआत में बागपत जिले में दो साल तक एसडीएम के पद की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद उनका ट्रांसफर बाराबंकी कर दिया गया, यहां उन्हें मुख्य विकास अधिकारी के पद पर तैनात किया गया। विजय किरण आनंद मैनपुरी, उन्नाव, फिरोजाबाद, वाराणसी और शाहजहांपुर में डीएम के पद पर तैनात रहे हैं। 2017 में उन्हें माघ मेला और 2019 में अर्ध कुंभ मेला का अधिकारी बनाया गया था। उन्होंने पंचायती राज, सिंचाई और बेसिक शिक्षा जैसे विभागों में भी अपनी सेवाएं दी हैं।

9- मुख्य सचिव एसपी गोयल

सीएम योगी के प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल का भी महाकुंभ के सफल आयोजन में अहम योगदान रहा। 1989 बैच के एक प्रतिष्ठित आईएएस अधिकारी शशि प्रकाश गोयल का करियर कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिकाओं से चिह्नित है। 21 अगस्त, 1989 को आईएएस में अपनी नियुक्ति के बाद, गोयल ने इटावा में सहायक मजिस्ट्रेट के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। उनका करियर उत्तर प्रदेश में विभिन्न प्रमुख पदों के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ा, जिसमें मथुरा में संयुक्त मजिस्ट्रेट, कई जिलों में जिला मजिस्ट्रेट और लखनऊ में यूपीडेस्को के प्रबंध निदेशक शामिल हैं।

10- एडीजी भानु भास्कर

महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने वाले पुलिस अधिकारियों में एडीजी भानु भास्कर का अहम योगदान रहा है। फिर चाहे रेलवे स्टेशनों से लेकर संगम तट तक यात्रियों की सुरक्षा की बात हो या फिर खोए हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलाने की चुनौती, उन्होंने हर मोर्चे पर काम किया। 1996 बैच के आइपीएस भानु भास्कर ने मथुरा के एसएसपी पद पर तैनाती के दौरान तेल माफिया पर शिकंजा कसा था। वह मैनपुरी और बिकरू कांड समेत नौ बड़ी आपराधिक वारदातों की विशेष जांच दल के प्रभारी रहे हैं। उनको 2023 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक प्रदान किया गया है।

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