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यंग इंडिया तय करेगा लोकसभा 2024 चुनाव का एजेंडा, देश के विश्वविद्यालयों में मोदी सरकार की शिक्षा-रोज़गार नीतियों पर  जनमत संग्रह

संयुक्त छात्र मोर्चा लखनऊ विश्वविद्यालय ने कहा कि भाजपा केंद्र में सत्ता में रहते हुए अपने दस साल पूरे कर रही है और उसके शासन की असंवैधानिक रवैये और सांप्रदायिक राजनीति पहले से कहीं अधिक स्पष्ट है। 2024 के लोकसभा चुनावों में इस देश के आम लोगों के सामने खड़ी गहरी असमानता (सामाजिक और आर्थिक दोनों), बेरोजगारी और सस्ती शिक्षा की कमी के साथ आ रहे हैं।

By santosh singh 
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लखनऊ। संयुक्त छात्र मोर्चा लखनऊ विश्वविद्यालय ने कहा कि भाजपा केंद्र में सत्ता में रहते हुए अपने दस साल पूरे कर रही है और उसके शासन की असंवैधानिक रवैये और सांप्रदायिक राजनीति पहले से कहीं अधिक स्पष्ट है। 2024 के लोकसभा चुनावों में इस देश के आम लोगों के सामने खड़ी गहरी असमानता (सामाजिक और आर्थिक दोनों), बेरोजगारी और सस्ती शिक्षा की कमी के साथ आ रहे हैं।

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आगामी आम चुनाव में कई युवा पहली बार वोट डालेंगे। इस महत्वपूर्ण समय में ‘यंग इंडिया चार्टर 2024’ अभियान शुरू किया गया, जहां पहले चरण में शिक्षा और रोजगार पर भाजपा सरकार की विफलताओं के लिए जवाबदेही की मांग के लिए एक बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया।

अभियान का दूसरा चरण – ‘यंग इंडिया रेफरेंडम’ – देश भर के 50 से अधिक विश्वविद्यालयों के छात्र अपने कॉलेज के गेट पर, अपने विभागों के बाहर व छात्रों के इलाकों (जहाँ रहकर छात्र पठन-पाठन करते हैं) में छात्रों के संयुक्त मोर्चे द्वारा स्थापित बूथों पर शिक्षा और रोजगार के ठोस सवालों पर अपना वोट डालेंगे।

यह जनमत संग्रह गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय (उत्तराखंड), दिल्ली विश्वविद्यालय (दिल्ली) से कालीकट विश्वविद्यालय (केरल), जादवपुर विश्वविद्यालय (पश्चिम बंगाल) से पंजाबी विश्वविद्यालय तक किया जा रहा है और इसमें तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु, पटना विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, बीएचयू, जामिया मिलिया इस्लामिया, एचसीयू, एसके विश्वविद्यालय और अन्य विश्वविद्यालय शामिल हों रहे हैं।

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दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 कॉलेजों, जामिया मिलिया इस्लामिया के सभी विभागों और दिल्ली के अंबेडकर विश्वविद्यालय के कश्मीरी गेट और करमपुरा परिसर में वोटिंग बूथ बनाए जाएंगे। जनमत संग्रह 7, 8 और 9 फरवरी को कराया जा रहा है। जनमत संग्रह से पहले जगह एवं तिथि का विस्तृत कार्यक्रम भी जारी किया गया है।

भाजपा इस देश के छात्रों और युवाओं के उम्मीदो पर विफल रही है और शिक्षा तक अधिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्रवाई के बजाय केवल खोखली बयानबाजी की है। रेलवे और पीएसयू जैसी राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचने के सभी प्रयास, श्रम का ठेकाकरण आदि के कारण देश का युवा बेरोजगारी झेल रहा है। लेकिन इस बार हम युवा चुनावों के लिए एजेंडा तय कर रहे हैं – जो शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार के मुद्दों पर लड़ा जाएगा, न कि धार्मिक मुद्दों पर या ‘हिंदू राष्ट्र’ को आगे बढ़ाने के वादों पर।

हम शिक्षण समुदाय, नागरिक समाज संगठनों और विपक्षी दलों से इस जनमत संग्रह में शामिल होने तथा छात्र- नौजवानों के साथ हाथ मिलाने की अपील करते हैं। साथ ही, हम अपने मीडिया मित्रों को जनमत संग्रह के दिन हमारे मतदान केंद्रों पर उपस्थित होने तथा छात्र-युवाओं को एकजुट होकर अपना जनादेश देने और आगामी चुनावों के लिए एजेंडा तय करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।

 

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