तेजस्वी यादव की ताजपोशी पर बहन रोहणी आचार्य ने निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, सियासत के शिखर-पुरुष की गौरवशाली पारी का एक तरह से पटाक्षेप, ठकुरसुहाती करने वालों और "गिरोह-ए-घुसपैठ " को उनके हाथों की "कठपुतली बने शहजादा" की ताजपोशी मुबारक ...
पटना। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पटना के मौर्या होटल में चल रही है। आरजेडी की इस बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्ति किया गया। इस मौके पर राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती के साथ संजय यादव भी मौजूद थे।
वहीं, तेजस्वी यादव की ताजपोशी पर बहन रोहणी आचार्य ने निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, सियासत के शिखर-पुरुष की गौरवशाली पारी का एक तरह से पटाक्षेप, ठकुरसुहाती करने वालों और “गिरोह-ए-घुसपैठ ” को उनके हाथों की “कठपुतली बने शहजादा” की ताजपोशी मुबारक …
सियासत के शिखर – पुरुष की गौरवशाली पारी का एक तरह से पटाक्षेप , ठकुरसुहाती करने वालों और " गिरोह – ए – घुसपैठ " को उनके हाथों की "कठपुतली बने शहजादा" की ताजपोशी मुबारक ..
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) January 25, 2026
वहीं, इससे पहले उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा था कि, जो सही मायनों में लालूवादी होगा, जिस किसी ने भी लालू जी के द्वारा, हाशिए पर खड़ी आबादी-वंचितों के हितों के लिए मजबूती से लड़ने वाली, खड़ी की गयी पार्टी के लिए निःस्वार्थ भाव से संघर्ष किया होगा, जिस किसी को भी लालू जी के द्वारा सामाजिक-आर्थिक न्याय के लिए किए गए सतत संघर्ष एवं प्रयासों का गौरवबोध होगा, जिसे लालू जी की राजनीतिक विरासत व् विचारधारा को गर्व के साथ आगे ले जाने की परवाह होगी, वो अवश्य ही पार्टी की मौजूदा बदहाली के लिए जिम्मेवार लोगों से सवाल करेगा एवं ऐसे लोगों की संदिग्ध-संदेहास्पद भूमिका के खिलाफ अंजाम की परवाह किए बिना अपनी आवाज उठाएगा।
वर्त्तमान की कड़वी, चिंताजनक एवं दुःखद सच्चाई यही है कि ” आज जनता के हक़-हकूक की लड़ाई लड़ने के लिए जानी जाने वाली, जन-जन की पार्टी की असली कमान फासीवादी विरोधियों के द्वारा भेजे गए वैसे घुसपैठियों-साजिशकर्ताओं के हाथों में है, जिन्हें लालूवाद को तहस-नहस करने के टास्क के साथ भेजा गया है, कब्ज़ा जमाए बैठे ऐसे लोग अपने गंदे मकसद में काफी हद तक सफल होते भी दिखते हैं”..
रोहिणी आचार्य ने आगे लिखा, नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल रहे को सवालों से भागने , सवालों से बचने , जवाब देने से मुंह चुराने, तार्किक – तथ्यात्मक जवाब देने की बजाए भ्रम फ़ैलाने, लालूवाद व् पार्टी की हित की बात करने वालों के साथ दुर्व्यवहार , अभद्र आचरण , अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने की बजाए अपने गिरेबान में झांकना होगा और अगर “वो” चुप्पी साधता है, तो उस पर साजिश करने वाले गिरोह के साथ मिलीभगत का दोष व् आरोप स्वतः ही साबित होता है।