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हम नेहरू-गांधी की विचारधारा और बाबा साहब के सम्मान के लिए आख़िरी दम तक लड़ेंगे: मल्लिकार्जुन खरगे

हमने संसद सत्र में संविधान के ऊपर हो रहे चर्चा के दौरान डा० बाबा साहेब अंबेडकर के बारे में गृह मंत्री का घोर अपमानजनक बयान सुना। हमने आपत्ति दर्ज की, विरोध जताया, प्रदर्शन किया।अब तो पूरे देश में प्रदर्शन हो रहा है। किन्तु प्रधानमंत्री और सरकार गलती मानने को तैयार नहीं है। अमित शाह से माफ़ी और इस्तीफ़ा लेना तो दूर, उल्टा आपत्तिजनक बयान का समर्थन किया। गृह मंत्री के बचाव में प्रधानमंत्री ने बयान जारी किया।

By शिव मौर्या 
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CWC meeting in Belagavi:  कर्नाटक के बेलगावी में कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक चल रही है। नव सत्याग्रह बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, आज कांग्रेस के इतिहास में बहुत सुनहरा दिन है। गांधीजी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के सौवें वर्ष पर बेलगांव में महात्मा गांधी नगर में ऐतिहासिक नव सत्याग्रह बैठक हो रही है। 100 साल पहले यहीं 26 दिसंबर 1924 को 3 बजे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले मौलाना मुहम्मद अली कांग्रेस अध्यक्ष थे। इस मौके पर सेवादल के संस्थापक Dr. N S Hardikar को याद कर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। यहीं से कांग्रेस के इतिहास में रोज सुबह राष्ट्रीय ध्वज समारोह पूर्वक फहराने और शाम को उतारने का सिलसिला आरंभ हुआ।

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उन्होंने आगे कहा, गांधीजी केवल एक बार एक साल के लिए ही कांग्रेस अध्यक्ष बने थे। लेकिन उन्होंने इसके बाद इतनी लंबी लकीर खींची कि उसकी बराबरी कर पाना किसी भी राजनेता के लिए संभव नहीं है। गांधीजी ने कांग्रेस के संविधान को नया रूप दिया। गांव, गरीब, किसानों औऱ मजदूरों के दिलों में कांग्रेस के लिए मजबूत आधार बनाया। कांग्रेस संगठन को रचनात्मक कामों से जोड़ा। छुआछूत औऱ भेदभाव के खिलाफ मुहिम को कांग्रेस के मुख्य एजेंडे में शामिल किया। आप सभी को गर्व होना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी के पास राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की विरासत है। हम लोग उनके उत्तराधिकारी है।

साथ ही कहा, उन दिनों कोहाट और गुलबर्गा जैसे शहरों में हो रहे सांप्रदायिक दंगों से आहत होकर उन्होंने चिंता व्यक्त की थी, और कहा था, “When quarrels become a normal thing of life, it is called civil war and parties must fight it out themselves”. मोतीलाल नेहरू जी ने दंगों की निंदा करते हुए Resolution move किया था। गुलबर्गा, जहां से मैं आता हूं वहां दंगों से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना ज़ाहिर की गयी थी। बहुत अफ़सोस की बात है कि 100 साल बाद भी आज का सत्ताधारी दल और उनके नेता खुलेआम भड़काऊ नारे देते हैं और उनके बड़े नेता ही समाज में सदभाव बिगाड़ रहे हैं, समुदायों के बीच नफ़रत फैला रहे हैं। लोगों को लड़ाने का काम कर रहे हैं।

महात्मा गांधी ने यहीं से कांग्रेस पार्टी में विभिन्न मत के लोगों के होने के बावजूद, एकता- Unity के महत्व का संदेश देते हुए कहा था कि “जब तक जगत में मस्तिष्क अलग है, तब तक मत भी अलग होगा। लेकिन हम हरेक को ह्रदय से लगाना चाहते हैं।” बेलगांव अधिवेशन की एक और खास बात ये थी कि पहली बार महात्मा गांधी ने छुआछूत (untouchability) के ख़िलाफ़ एक देशव्यापी अभियान की शुरुआत की। इसे कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि अस्पृश्यता स्वराज की राह की सबसे बड़ी बाधाओं में है। जितना जल्दी हम यह काम करें हमारे हित में है। 1925 में गांधीजी केरल जाकर Viacom सत्याग्रहियों से मिले और उनकी मांग का समर्थन किया था।

उन्होंने आगे कहा, पिछले 140 वर्षों की यात्रा में पार्टी ने बहुत उतार चढाव देखे। पर कांग्रेस आज भी गांधीजी के विचारों की रोशनी में उनके सिद्धांतों को समर्पित और उसूलों पर कायम है। कर्नाटक मेरा गृह राज्य है। यहीं से मेरी लंबी राजनीतक यात्रा का आरंभ हुआ। आज मुझे बहुत गर्व होता है कि 100 साल पहले महात्मा गांधी ने जिस महान दायित्व को संभाला था उसकी स्मृतियों में कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में मुझे शामिल होने का मौका मिला है। आज हम जब 100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक क्षण को पुनर्जीवित कर रहे हैं तो कर्नाटक में गांधीजी के विचारों की सरकार चल रही है। संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढाते हुए महात्मा बसेश्वर, महात्मा फुले औऱ बाबा साहेब डॉ अंबेडकर जैसे महापुरुषों के दिखाए विचारों पर आगे बढ़ रही है।

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साथ ही कहा, हमने संसद सत्र में संविधान के ऊपर हो रहे चर्चा के दौरान डा० बाबा साहेब अंबेडकर के बारे में गृह मंत्री का घोर अपमानजनक बयान सुना। हमने आपत्ति दर्ज की, विरोध जताया, प्रदर्शन किया।अब तो पूरे देश में प्रदर्शन हो रहा है। किन्तु प्रधानमंत्री और सरकार गलती मानने को तैयार नहीं है। अमित शाह से माफ़ी और इस्तीफ़ा लेना तो दूर, उल्टा आपत्तिजनक बयान का समर्थन किया। गृह मंत्री के बचाव में प्रधानमंत्री ने बयान जारी किया। राहुल गांधी पर झूठा केस दर्ज कर दिया। ये है आज के हुक्मरान का संविधान और उसके निर्माता के प्रति नज़रिया। परन्तु हम किसी से डरनेवाले नहीं हैं ना ही झुकने वाले हैं। हम नेहरू-गांधी की विचारधारा और बाबा साहब के सम्मान के लिए आख़िरी दम तक लड़ेंगे।

बीजेपी के लोग हमारे ऊपर झूठा आरोप लगाते हैं कि हमने बाबा साहब का सम्मान नहीं किया। सब को मालूम है कि संसद में जो बाबा साहेब की मूर्ति 1967 में कांग्रेस ने लगवायी। मुझ जैसे हज़ारों कार्यकर्ताओं की मांग को मानते हुए इंदिरा जी के कार्यकाल में राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णनजी ने संसद में मुख्य स्थान पर पहली बड़ी मूर्ति बाबा साहेब की ही स्थापित कराई। इसलिए मैं कहता हूं कि BJP-RSS वाले झूठ बोलना बंद कर दें। प्रधानमंत्री जी जब पहली बार संसद में चुनकर आए थे तो उन्होंने पुराने संसद की सीढ़ियों पर माथा टेका था जिसके बाद नए संसद का निर्माण हो गया। हमें डर इस बात का है कि इस बार नए संसद भवन में शपथ लेने के पहले इन्होंने संविधान के सामने माथा टेका है। हमें मालूम है, ये उनका पुराना project है। उन्होंने संविधान, तिरंगा, गांधी, नेहरू, अंबेडकर सभी की आलोचना की है, सभी का विरोध किया है। सभी के पुतले फूंके हैं।

सत्ताधारी दल के लोगों के द्वारा संविधान के प्रस्तावना का अपमान होता रहता है। संवैधानिक प्रवधानों और मूल्यों का आदर नहीं होता है । संविधानिक संस्थाओं को Control किया जा रहा है, मिसाल के तौर पर Election Commission of India को ही देखें, तो यही मालूम होता है कि इनके मन में संवैधानिक संस्थाओं के लिए कोई आदर नहीं है, ये सब पर कब्जा करना चाह्ते हैं। इसलिए हमें यह लड़ाई लगातार लड़नी पड़ेगी।

 

 

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