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हालात से नहीं हारी गया की बेटी, पति की मौत के बाद भी पढ़ाई जारी रख BPSC में पाई सफलता

बिहार में गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड के अंदर आनेवाली तेतरिया गांव की प्रियंका कुमारी की कहानी बेहद ही संघर्षमय है। जिस उम्र में परिवार और स्वजनों के सहारे की जरूरत होती है, उस उम्र में प्रियंका के सामने अपने बेटे की परवरिश, आर्थिक जरूरतों और भविष्य की चिंता एक साथ खड़ी हो गई।

By Sushil Sah 
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गया। बिहार में गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड के अंदर आनेवाली तेतरिया गांव की प्रियंका कुमारी की कहानी बेहद ही संघर्षमय है। जिस उम्र में परिवार और स्वजनों के सहारे की जरूरत होती है, उस उम्र में प्रियंका के सामने अपने बेटे की परवरिश, आर्थिक जरूरतों और भविष्य की चिंता एक साथ खड़ी हो गई।

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सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पति की मौत के बाद उनकी मुश्किलें काफी बढ़ गई और इनसे उबारने वाला कोई सहारा नहीं था। ऐसे में उन्होंने शिक्षा के रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। आपको बता दें कि वर्ष 2012 में विवाह के बाद वर्ष 2014 में सांप के काटने से प्रियंका के पति की मृत्यु हो गई। उस समय गोद में बेटा बिट्टू था। आर्थिक संकट के बीच यह तय करना आसान नहीं था कि पहले परिवार की जरूरतें पूरी की जाएं या अपने सपनों को आगे बढ़ाया जाए। प्रियंका ने जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने के बजाय कठिन रास्ता को अपनाया। उन्होंने कमाने के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया।

आपको बता दें कि प्रियंका ने गांव के एक निजी विद्यालय में पढ़ाना शुरू किया। फिर भी परिवार की जरूरतें पूरी नहीं होती थीं क्योंकि बहुत कम पैसा मिलता था। इसलिए शाम में बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाने लगीं। रात में जब घर शांत होता, तब वह अपनी किताबें खोलकर बैठती थीं। कई बार महज तीन-चार घंटे की नींद लेकर अगले दिन फिर उसी संघर्ष में जुट जाती थीं। उनके इस सफर में सबसे बड़ी ताकत कोई बाहरी सहारा नहीं, बल्कि खुद पर भरोसा और आगे बढ़ने की प्रतिज्ञा थी। साथ ही जब जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ता गया, तब उन्होंने अपने लक्ष्य को छोड़ने के बजाय मेहनत काफी बढ़ा दी। प्रियंका की यही जिद धीरे-धीरे उनकी सफलता की नींव बनी।

आपको बता दें कि प्रियंका ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से वर्ष 2017-18 में डीएलएड की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद सरकारी शिक्षिका बनने के लक्ष्य के साथ तैयारी जारी रखी। इस निरंतर मेहनत का परिणाम वर्ष 2023 में मिला, जब उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की। बता दें कि आज वह प्राथमिक विद्यालय तेतरिया में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। साथ ही वह अपने बेटे बिट्टू की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए भी लगातार प्रयास कर रहीं हैं।

प्रियंका का जीवन आज की नई पीढ़ी की युवतियों के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत संदेश देता है। उनके संघर्ष से यह सीखने को मिलती है कि हर किसी को जीवन में अनुकूल परिस्थितियां या मदद करने वाला हाथ नहीं मिलते।

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