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जब आलोचना से व्यथित होकर मनमोहन सिंह ने दिया इस्तीफा, मनाने पहुंचे अटल बिहारी वाजपेयी, फिर ऐसे माने…

देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह निधन (Former Prime Minister of the country Dr. Manmohan Singh passed away) पर केंद्र सरकार ने सात दिनों का राष्ट्रीय शोक (National Mourning) घोषित ​कर दिया है। इसके साथ पूरा देश डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) को अपना श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह निधन (Former Prime Minister of the country Dr. Manmohan Singh passed away) पर केंद्र सरकार ने सात दिनों का राष्ट्रीय शोक (National Mourning) घोषित ​कर दिया है। इसके साथ पूरा देश डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) को अपना श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है। इसी बीच उनके राजनीतिक किस्सों को याद किया जा रहा है। हम आपको उनके राजनीतिक जीवन के उस घटना के बारे में बताएंगे जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अटल बिहारी वाजपेयी (Leader of Opposition in Lok Sabha Atal Bihari Vajpayee) के तंज से वो इतने व्यथित हो गए थे कि इस्तीफे की पेशकर कर दी थी।

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जानिए क्या है मामला?

डॉक्टर मनमोहन सिंह नरसिम्हा राव सरकार (Narasimha Rao Government) में वित्त मंत्री थे। इस दौरान उन्होंने आर्थिक नीति में कई बदलाव किए। उनके आर्थिक नीति का ही नतीजा था कि देश में उदारीकरण के दरवाजे खुले। बतौर वित्त मंत्री साल 1992 में उन्होंने अपना बजट ड्राफ्ट तैयार किया था, लेकिन पीएम राव ने उन्हें इसे दोबारा लिखने को कहा।

संसद में बजट भाषण के देना चाहते थे इस्तीफा

नए ड्राफ्ट के साथ उन्होंने संसद में बजट भाषण दिया। शब्दों के जादूगर अटल बिहारी वाजपेई ने उनके भाषण पर जमकर हमला किया। भरे सदन में अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) ने उनकी इतनी आलोचना की कि डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh)  को बुरा लग गया। अटल के कड़वे शब्दों को दिल पर लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने इस्तीफे की पेशकश की।

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जब मनाने पहुंचना पड़ा अटल को

प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव (Prime Minister Narasimha Rao) ने जब उनकी बातें सुनी तो उन्होंने तुरंत लोकसभा में नेता विपक्ष अटल बिहारी वाजपेयी (Leader of Opposition in Lok Sabha Atal Bihari Vajpayee)  को फ़ोन लगा दिया। इसके बाद पूरी बात बताई। तुरंत वाजपेयी डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh)  से मिलने पहुंच गए। उन्हें जाकर समझाया कि विपक्ष के नेता होने के नाते उन्होंने ऐसा कहा। विपक्ष का काम है सरकार की आलोचना करना। उनके खिलाफ तीखे बयान देना। इन बातों को दिल पर लेने की जरूरत नहीं है। अटल जी की बातें सुनने के बाद मनमोहन सिंह ने अपना मन बदला और फिर इस्तीफा वापस लिया।

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