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आर्थिक सर्वेक्षणः 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ेगी रफ्तार

By शिव मौर्या 
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नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार 2.0 का तीसरा आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर दिया दिया गया है। इस रिपोर्ट के जरिए देश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से मिलने वाले परिणामों को दर्शाती है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी 2021 को संसद में बजट पेश करेंगी।

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दरअसल, बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया जाता है। बता दें कि, चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी का अनुमान -7.7 फीसद लगाया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में अगले वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान इसलिए भी मायने रखता है, क्योंकि इससे जानकारी मिलती है कि सरकार को किस रफ्तार से अर्थव्यवस्था के दुरुस्त होने की उम्मीद है।

सर्वे में भारतीय अर्थव्यवस्थाका रोडमैप भी है तो 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने के लिए कई बातों पर विशेष ध्यान दिया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21, मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति वेंकट सुब्रमण्यन के नेतृत्व में एक टीम द्वारा तैयार किया गया है, जो अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति के साथ-साथ सुधारों का वर्णन करता है जो विकास को गति देने के लिए किए जाने चाहिए।

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?
आर्थिक सर्वेक्षण पिछले एक साल की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट होती है, जिसमें अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रमुख चुनौतियों और उनसे निपटने का जिक्र होता है। आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में इस दस्तावेज को तैयार किया जाता है।

 

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