प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले (Money laundering case) में रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी (Reliance Group Chairman Anil Ambani) के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने मुंबई के पॉश इलाके में स्थित उनके आलीशान घर एबोड को कुर्क कर लिया है।
मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले (Money laundering case) में रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी (Reliance Group Chairman Anil Ambani) के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने मुंबई के पॉश इलाके में स्थित उनके आलीशान घर एबोड को कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई वित्तीय जांच एजेंसियों के कड़े रुख को दर्शाती है और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक बड़ा घटनाक्रम है।
यह जब्ती धन शोधन निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत एक अनंतिम आदेश जारी करके की गई है। ईडी (ED) द्वारा कुर्क की गई यह बहुमंजिला संपत्ति मुंबई के प्रतिष्ठित पाली हिल इलाके में स्थित है। ‘एबोड’ नामक यह बेहद आलीशान घर 66 मीटर ऊंचा है और इसमें 17 मंजिलें हैं। आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि कुर्क की गई इस एकल संपत्ति का मूल्य 3,716.83 करोड़ रुपये आंका गया है।
जानें किस मामले में हुई कार्रवाई?
ईडी (ED) की यह बड़ी कार्रवाई अनिल अंबानी (Anil Ambani)की समूह कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) से जुड़े एक कथित बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच का सीधा परिणाम है। इस नवीनतम आदेश के साथ ही, इस हाई-प्रोफाइल बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य अब लगभग 15,700 करोड़ रुपये के भारी-भरकम आंकड़े तक पहुंच गया है।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई?
इस मामले में 66 वर्षीय उद्योगपति अनिल अंबानी (Anil Ambani) की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, अंबानी को इस मामले में दूसरे दौर की पूछताछ के लिए जल्द ही संघीय जांच एजेंसी के समक्ष पेश होना है। इससे पहले, वे अगस्त 2025 में पहली बार ईडी के सामने पेश हुए थे, जहां पीएमएलए के तहत उनका आधिकारिक बयान दर्ज किया गया था।
मुंबई के सबसे महंगे और चर्चित आवासों में से एक ‘एबोड’ का कुर्क होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों (Money laundering case) में कोई भी रियायत नहीं दी जा रही है। 15,700 करोड़ रुपये की कुल जब्ती के साथ, यह मामला भारत के कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय जांच अभियानों में से एक बन गया है, जिसके अगले घटनाक्रमों पर बाजार और निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।