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हर महिला को जान लेनी चाहिए यह बात, क्या मासिक धर्म के दौरान व्रत करना चाहिए?

जैसा की हम सभी जानते हैं की अधिकतर धर्मो में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अपवित्र और अशुभ माना जाता है। आपने देखा होगा की मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को मंदिर जाने या फिर घर के पूजा घर में भी जाने की इजाजत नहीं होती। लेकिन अब ये सवाल उठता है की जब धार्मिक रूप से महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अशुभ और अपवित्र माना जाता है तो फिर वो इस दौरान कोई व्रत क्यों रखती है या फिर इस दौरान उन्हें व्रत करने का कोई फल मिलता भी है या नहीं। क्या ये शास्त्रोन्मत है अगर हाँ तो इसके पीछे क्या कारण है ?

By टीम पर्दाफाश 
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Every Woman Should Know This Should She Fast During Menstruation

नई दिल्ली: जैसा की हम सभी जानते हैं की अधिकतर धर्मो में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अपवित्र और अशुभ माना जाता है। आपने देखा होगा की मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को मंदिर जाने या फिर घर के पूजा घर में भी जाने की इजाजत नहीं होती। लेकिन अब ये सवाल उठता है की जब धार्मिक रूप से महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अशुभ और अपवित्र माना जाता है तो फिर वो इस दौरान कोई व्रत क्यों रखती है या फिर इस दौरान उन्हें व्रत करने का कोई फल मिलता भी है या नहीं। क्या ये शास्त्रोन्मत है अगर हाँ तो इसके पीछे क्या कारण है ?

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मित्रों इन सवालों का जबाव देने से पहले आपको ये बता दूँ की भागवत पुराण के अनुसार मासिक धर्म के दौरान महिलाएं ब्रह्महत्या जैसी पाप को झेल रही होती है जी हाँ भागवत पुराण वर्णित कथा के अनुसार एक बार इंद्रदेव किसी अपमानजनक बात से गुरु बृहस्पति उनसे नाराज हो गए और वो स्वर्गलोक छोड़कर कहीं चले गए। उधर जब इस बात की सूचना असुरों को मिली तो असुरों ने देवलोक पर आक्रमण कर दिया। जिसमे देवराज राज को पराजय का सामना करना पड़ा और उन्हें अपनी गद्दी छोड़कर भागना पड़ा। उसके बाद इंद्रदेव ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और उनसे मदद करने को कहा। तब ब्रह्मा जी इंद्र से बोले इस समस्या से निजात पाने के लिए तुम्हे एक ब्रह्म ज्ञानी की सेवा करनी होगी। यदि वह तुम्हारी सेवा से प्रसन्न हो गए तो तुम्हे स्वर्गलोक वापस मिल जाएगी।

उसके बाद ब्रह्माजी के कहे अनुसार इंद्रदेव एक ब्रह्म ज्ञानी की सेवा करने लगे। लेकिन इंद्रदेव इस बात से अनजान थे कि जिनकी वो सेवा कर रहे है उस ज्ञानी की माता असुर है। जिसकी वजह से उस ज्ञानी को असुरों से अधिक लगाव था। असुरों से लगाव की वजह से वो ब्रह्मज्ञानी इंद्रदेव की सारी हवन सामग्री देवताओं की बजाय असुरों को अर्पित कर देते थे।उधर कुछ दिनों बाद जब इस बात का पता इंद्रदेव को चला तो उन्होंने क्रोध में आकर उस ज्ञानी की हत्या कर दी। फिर उन्हें जब यह ज्ञात हुआ की उन्होंने ब्रह्महत्या कर बहुत बड़ा अधर्म कर दिया है तो वो एक फूल में छिपकर भगवान विष्णु की पूजा करने लगे।

कुछ दिनों बाद विष्णु जी इंद्रदेव की पूजा से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और उन्हें बोले हे देवराज ब्रह्महत्या जैसे पाप से मुक्ति के लिए तुम्हे इसे पेड़, भूमि, जल और स्त्री में अपना थोड़ा-थोड़ा पाप बाँटना होगा। साथ मे सभी को एक एक वरदान भी देना होगा। उसके बाद इंद्रदेव सबसे पहले पेड़ से अपने पाप का अंश लेने का अनुरोध किया। तो पेड़ ने पाप का एक चौथाई हिस्सा ले लिया। जिसके बाद इंद्रदेव ने पेड़ को वरदान दिया की मरने के बाद तुम चाहो तो स्वयं ही अपने आप को जीवित कर सकते हो। उसके बाद इंद्रदेव के विनती करने पर जल ने पाप का कुछ हिस्सा अपने सर ले लिया। बदले में इंद्रदेव ने उसे अन्य वस्तुओं को पवित्र करने की शक्ति प्रदान की। इसी तरह भूमि ने भी इंद्र देव के पाप का कुछ अंश स्वीकार कर लिया।जिसके बदले इंद्रदेव ने भूमि को वरदान दिया की उस पर आई चोटें अपने आप भर जाएगी।

अंत में इंद्रदेव स्त्री के पास पहुंचे तो स्त्री ने बांकी बचा पाप का सारा अंश अपने ऊपर ले लिया। इसके बदले इंद्रदेव ने स्त्रियों को वरदान दिया कि पुरुषों की तुलना में महिलाएँ काम का आनंद ज्यादा ले पाएँगी और ऐसा माना जाता है की तभी से महिलाएं मासिक धर्म के रूप में ब्रह्म हत्या का पाप झेल रही है।

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तो मित्रों जैसा की आपने कथा में देखा की जब इंद्रदेव ब्रह्महत्या के पाप को झेल रहे तो उन्होंने फूल में छिपकर विष्णु जी आरधना की थी परन्तु उस समय ना तो उनके सामने कोई भी श्री विष्णु की प्रतिमा थी और नाही वो किसी मंदिर में थे। ठीक इसी तरह महिलाएं भी मासिक धर्म के दौरान व्रत तो कर सकती है लेकिन मंदिर नहीं जा सकती है और ना ही किसी मूर्ति की पूजा कर सकती है। परन्तु अगर इस दौरान ऐसा करती है तो भागवत पुराण के अनुसार उसे पाप माना गया है यानी मासिक धर्म के दौरान अगर कोई स्त्री मंदिर चली जाती है या फिर किसी देव की प्रतिमा को पूजती है तो वो पाप की भागिदार मानी जाती है जिसकी सजा उसे इसी जन्म में भुगतनी पड़ती है। लेकिन आपको ये भी बता दूँ की इस दौरान महिलाएं मानसिक रूप से कमजोर हो जाती है इसलिए उनका तिरस्कार करने के बजाय उनके मनोबल बढ़ाने का कार्य करें। क्यूंकि कई जगह ऐसा देखा जाता है की जानकारी के आभाव में लोग मासिक धर्म के दौरान महिलाओं से बुरा बर्ताव करने से भी नहीं चूकते।

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