1. हिन्दी समाचार
  2. वीडियो
  3. Jharkhand News: गर्भवती महिला को खाट पर 3 KM ढोकर ले जाते दिखे परिजन, झारखंड से सामने आया दिल को झकझोर देने वाला Video

Jharkhand News: गर्भवती महिला को खाट पर 3 KM ढोकर ले जाते दिखे परिजन, झारखंड से सामने आया दिल को झकझोर देने वाला Video

झारखंड के कुंदा प्रखंड  की है। यहाँ से एक ऐसी विवशता की तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर किसी की आँखें नम हो गयी है। बता दें कि प्रखंड के लुकुइया गाँव में प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती महिला को परिजन तीन किलोमीटर खाट पर लादकर अस्पताल ले गए।गांव तक पहुंचने के लिए सड़क न होने के कारण ममता वाहन बीच रास्ते में ही बंद हो गया। मिली जानकारी के मुताबिक महिला को जब प्रसव पीड़ा हुई, तो परिजनों ने तुरंत ममता वाहन को बुलाया। लेकिन प्रॉबलम वहाँ हुई जब वाहन नहीं पहुंचा।

By Aakansha Upadhyay 
Updated Date

क्या कुछ गाँव में अभी भी गर्भवती महिलाओं को हॉस्पिटल के लिए कोरोना  काल  की  तरह प्रॉबलम सहना पड़ता है? जी हाँ !ये  खबर झारखंड के   कुंदा प्रखंड  की है। यहाँ से एक ऐसी विवशता की तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर किसी की आँखें नम हो गयी है। बता दें कि प्रखंड के लुकुइया गाँव में प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती महिला को परिजन तीन किलोमीटर खाट पर लादकर अस्पताल ले गए।

पढ़ें :- नीतीश कुमार राज्यसभा नामांकन के बाद बोले- नई सरकार को सहयोग रहेगा, इस पद पर ठोका दावा

गांव तक पहुंचने के लिए सड़क न होने के कारण ममता वाहन बीच रास्ते में ही बंद हो गया। मिली जानकारी के मुताबिक महिला को जब प्रसव पीड़ा हुई, तो परिजनों ने तुरंत ममता वाहन को बुलाया। लेकिन प्रॉबलम वहाँ हुई जब वाहन नहीं पहुंचा । गांव से बाहर निकलते ही टेढ़ा पन्ना और मोहन नदियाँ मिलती हैं। दोनों नदियों पर पुल नहीं बने हैं। बरसात के दिनों में पानी के तेज बहाव के कारण पूरा गाँव टापू बन जाता है। लाचार होकर परिजनों ने गर्भवती महिला को खाट पर लिटा दिया और तीन किलोमीटर पगडंडी पर पैदल चले। गर्भवती महिला दर्द से कराहती रही।

गांव के बाहर पहुंचने के बाद ही ममता वाहन उपलब्ध हुआ, जिसके बाद उन्हें नकड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। लुकुइया गांव अनुसूचित जनजाति बहुल है। आबादी करीब तीन सौ है। इसके बावजूद गांव में सड़क, पुल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को बाहर ले जाना काफी मुश्किल हो जाता है।

अरविंद गंझू ने कहा कि हर दो-चार दिन में किसी न किसी मरीज को खाट या पालकी पर लादकर बाहर ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक दोनों नदियों पर पुल का निर्माण नहीं होता, तब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

 

पढ़ें :- महाराष्ट्र की राजनीति में बीजेपी ने किया बड़ा खेला, शरद पवार के खिलाफ नहीं उतारे उम्मीदवार, निर्विरोध पहुंच जाएंगे राज्यसभा

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...