अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर जोर फोटो शेयर की है, उसमें एक बुजुर्ग किसान रोते हुए दिख रहे हैं। सपा अध्यक्ष ने लिखा कि, ये वीडियो भाजपा के उन कार्यकर्ताओं और समर्थकों को देखकर अपने ऊपर शर्मिंदा होना चाहिए, जो भाजपा राज में ‘अमृतकाल’ की बात कर रहे हैं। दरअसल भाजपा अपने भोले भाले समर्थकों के भोलेपन का भी दुरुपयोग, अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए, दुष्प्रचार के लिए करती है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इन दिनों खाद के लिए किसानों को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। खाद नहीं मिलने के कारण धान और गन्ने की फसल खराब हो रही है। समीतियों में खाद के लिए किसानों की लंबी—लंबी लाइने देखने को मिल रही हैं। इस बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खाद के लिए लगी लाइन की एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, सबसे पहले तो भाजपाई ही ये याद रखें कि ‘भाजपा किसी की सगी नहीं है’ और भाजपा ‘इस्तेमाली’ पार्टी है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर जोर फोटो शेयर की है, उसमें एक बुजुर्ग किसान रोते हुए दिख रहे हैं। सपा अध्यक्ष ने लिखा कि, ये वीडियो भाजपा के उन कार्यकर्ताओं और समर्थकों को देखकर अपने ऊपर शर्मिंदा होना चाहिए, जो भाजपा राज में ‘अमृतकाल’ की बात कर रहे हैं। दरअसल भाजपा अपने भोले भाले समर्थकों के भोलेपन का भी दुरुपयोग, अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए, दुष्प्रचार के लिए करती है।
ये वीडियो भाजपा के उन कार्यकर्ताओं और समर्थकों को देखकर अपने ऊपर शर्मिंदा होना चाहिए, जो भाजपा राज में ‘अमृतकाल’ की बात कर रहे हैं। दरअसल भाजपा अपने भोले भाले समर्थकों के भोलेपन का भी दुरुपयोग, अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए, दुष्प्रचार के लिए करती है।
वो पढ़े-लिखे लोग भी एक… pic.twitter.com/BpZZAHbGRc
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 30, 2025
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वो पढ़े-लिखे लोग भी एक बार दिल पर हाथ रखकर सोचें कि साम्प्रदायिक राजनीति की घुट्टी पिलाकर भाजपा और उनके संगी-साथियों ने किस तरह उनके ज्ञान और विवेक को बंधक बना लिया है। भाजपा ऐसे लोगों को भी अपने झूठ के प्रचार की खेती में, नफ़रती व्हाट्सएप मैसेज और मिथ्या-संदेशों को आगे बढ़ाने के लिए खाद की तरह इस्तेमाल करती है।
उन्होंने आगे लिखा, सबसे पहले तो भाजपाई ही ये याद रखें कि ‘भाजपा किसी की सगी नहीं है’ और भाजपा ‘इस्तेमाली’ पार्टी है। भाजपा एक दिन उनको भी इस्तेमाल करके छोड़ देगी, तब वो कहीं के नहीं रहेंगे। भाजपा का साज़िशन फ़ार्मूला ही है: ‘पहले इस्तेमाल करें, फिर बर्बाद करें!’ भाजपा जाए तो खाद आए! किसान कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!