उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मनरेगा में कथित भ्रष्टाचार, फर्जी हाजिरी, मजदूरी भुगतान में अनियमितताओं तथा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मुद्दे पर भाजपा सरकार से गंभीर सवाल किए।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मनरेगा में कथित भ्रष्टाचार, फर्जी हाजिरी, मजदूरी भुगतान में अनियमितताओं तथा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मुद्दे पर भाजपा सरकार से गंभीर सवाल किए।
उन्होंने कहा कि पहले चंदा चोरी, फिर चढ़ावा चोरी, फिर वोट चोरी और अब गरीब मजदूरों की मजदूरी की चोरी। यूपीए सरकार ने मनरेगा को केवल एक योजना नहीं, बल्कि कानून बनाकर ग्रामीण गरीबों को रोजगार का अधिकार दिया था, ताकि मजदूरों को अपने गांव में ही काम मिले, पलायन रुके और ग्रामीण विकास को गति मिले। लेकिन आज उसी योजना की मूल भावना और मजदूरों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 8 जुलाई 2025 को केंद्र सरकार द्वारा जारी पत्र में क्लोन ऐप, फर्जी एवं डुप्लीकेट तस्वीरों, गलत लोकेशन टैगिंग, बिना कार्य मजदूरी भुगतान और बारिश के दौरान हाजिरी दर्ज किए जाने जैसी अनियमितताओं पर चिंता जताई गई थी। इसके बाद 12 राज्यों में निगरानी टीमें भेजी गईं। उत्तर प्रदेश के अयोध्या, संभल, रामपुर, हरदोई, गाजीपुर, देवरिया, महाराजगंज, चंदौली और जालौन सहित नौ जिलों की जांच का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि अयोध्या में भारी बारिश के दौरान 1,224 मजदूरों की हाजिरी कैसे दर्ज हुई?
आज उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आदरणीय श्रीमती @aradhanam7000 जी ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मनरेगा में कथित भ्रष्टाचार, फर्जी हाजिरी, मजदूरी भुगतान में अनियमितताओं तथा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मुद्दे पर भाजपा सरकार से गंभीर सवाल किए।
उन्होंने कहा कि पहले चंदा चोरी, फिर चढ़ावा चोरी, फिर वोट चोरी और अब गरीब मजदूरों की मजदूरी की चोरी। यूपीए सरकार ने मनरेगा को केवल एक योजना नहीं, बल्कि कानून बनाकर ग्रामीण गरीबों को रोजगार का अधिकार दिया था, ताकि मजदूरों को अपने गांव में ही काम मिले, पलायन रुके और ग्रामीण विकास को गति मिले। लेकिन आज उसी योजना की मूल भावना और मजदूरों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि 8 जुलाई 2025 को केंद्र सरकार द्वारा जारी पत्र में क्लोन ऐप, फर्जी एवं डुप्लीकेट तस्वीरों, गलत लोकेशन टैगिंग, बिना कार्य मजदूरी भुगतान और बारिश के दौरान हाजिरी दर्ज किए जाने जैसी अनियमितताओं पर चिंता जताई गई थी। इसके बाद 12 राज्यों में निगरानी टीमें भेजी गईं। उत्तर प्रदेश के अयोध्या, संभल, रामपुर, हरदोई, गाजीपुर, देवरिया, महाराजगंज, चंदौली और जालौन सहित नौ जिलों की जांच का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि अयोध्या में भारी बारिश के दौरान 1,224 मजदूरों की हाजिरी कैसे दर्ज हुई?
उन्होंने प्रदेश सरकार से पूछा कि जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? कथित क्लोन ऐप और फर्जी APK फाइलों की जांच क्यों नहीं कराई गई? अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद क्या कार्रवाई हुई और केंद्र सरकार के निर्देशों का प्रदेश के सभी जिलों में कितना अनुपालन हुआ?
उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रत्येक विकासखंड और ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों, हाजिरी एवं भुगतान की व्यापक और पारदर्शी जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो तथा सरकार पूरे प्रकरण पर श्वेतपत्र जारी करे। उन्होंने कहा कि यह धन जनता की गाढ़ी कमाई का है और गरीब मजदूरों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार्य नहीं है।
इसके साथ ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र और ग्रामीण विकास की बुनियाद हैं। समय पर पंचायत चुनाव कराना सरकार का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने चुनाव में देरी को लेकर प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और न्यायालय के निर्देशानुसार तीन महीने के भीतर निष्पक्ष एवं पारदर्शी पंचायत चुनाव कराने की मांग की।
— UP Congress (@INCUttarPradesh) October 15, 2026
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उन्होंने प्रदेश सरकार से पूछा कि जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? कथित क्लोन ऐप और फर्जी APK फाइलों की जांच क्यों नहीं कराई गई? अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद क्या कार्रवाई हुई और केंद्र सरकार के निर्देशों का प्रदेश के सभी जिलों में कितना अनुपालन हुआ?
उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रत्येक विकासखंड और ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों, हाजिरी एवं भुगतान की व्यापक और पारदर्शी जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो तथा सरकार पूरे प्रकरण पर श्वेतपत्र जारी करे। उन्होंने कहा कि यह धन जनता की गाढ़ी कमाई का है और गरीब मजदूरों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार्य नहीं है।
पंचायतें लोकतंत्र और ग्रामीण विकास की बुनियाद] न्यायालय के निर्देशानुसार तीन महीने के भीतर निष्पक्ष व पारदर्शी पंचायत चुनाव कराए सरकार
इसके साथ ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र और ग्रामीण विकास की बुनियाद हैं। समय पर पंचायत चुनाव कराना सरकार का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने चुनाव में देरी को लेकर प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और न्यायालय के निर्देशानुसार तीन महीने के भीतर निष्पक्ष एवं पारदर्शी पंचायत चुनाव कराने की मांग की।