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बिहार के मधुरेंद्र ने तीन घंटे में नाना पाटेकर को दी अनोखी श्रद्धांजलि, पीपल के पत्ते पर उकेरी उनकी तस्वीर

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) 75 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए। उनका नाम आते ही दमदार अभिनय, बुलंद आवाज और यादगार किरदार जेहन में उभर आते हैं। गुरुवार को उनके निधन की खबर से फैंस भावुक हो गए हैं। इसी बीच बिहार के चर्चित अंतरराष्ट्रीय लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार (International leaf artist Madhurendra Kumar) ने नाना पाटेकर (Nana Patekar)  को श्रद्धांजलि देने के लिए खास माध्यम चुना। जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया।

By santosh singh 
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पटना। बॉलीवुड (Bollywood) के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) 75 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए। उनका नाम आते ही दमदार अभिनय, बुलंद आवाज और यादगार किरदार जेहन में उभर आते हैं। गुरुवार को उनके निधन की खबर से फैंस भावुक हो गए हैं। इसी बीच बिहार के चर्चित अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार (International leaf artist Madhurendra Kumar) ने नाना पाटेकर (Nana Patekar)  को श्रद्धांजलि देने के लिए खास माध्यम चुना। जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया।

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मधुरेंद्र कुमार (Madhurendra Kumar) ने महज करीब 3 सेंटीमीटर के एक हरे पीपल के पत्ते को अपना कैनवास बनाया। उस पर नाना पाटेकर की सूक्ष्म तस्वीर उकेर दी। बता दें कि गोवा में कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) के बाद नाना पाटेकर (Nana Patekar)   का निधन हुआ।

मधुरेंद्र ने इस छोटी-सी कलाकृति को तैयार करने में करीब तीन घंटे का समय लगाया। पीपल का पत्ता बेहद नाजुक था। उस पर नाना पाटेकर की पहचान को उभारना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने बेहद बारीकी से चेहरे की भाव-भंगिमा और आकृति को पत्ते पर उतार दिया। इस कलाकृति की खास बात सिर्फ इसका छोटा आकार नहीं, बल्कि इतने छोटे कैनवास पर चेहरे की बारीकियों को उभारना भी है। हरे पत्ते पर उकेरी गई नाना पाटेकर (Nana Patekar)   की तस्वीर पहली नजर में ही ध्यान खींचती है।

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मधुरेंद्र ने तस्वीर के साथ पत्ते पर भावपूर्ण संदेश ‘अलविदा क्रांतिवीर नाना पाटेकर’ लिखा। नाना पाटेकर की चर्चित फिल्म क्रांतिवीर के किरदार और उनके दमदार अभिनय को याद करते हुए यह संदेश श्रद्धांजलि का भाव और गहरा कर देता है। मधुरेंद्र के लिए यह सिर्फ एक कलाकृति नहीं सिनेमा के एक ऐसे कलाकार को नमन है। जिसने अपने अलग अंदाज और प्रभावशाली संवाद अदायगी से दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई।

नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक लंबे करियर में हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। क्रांतिवीर, परिंदा, प्रहार, खामोशी और वेलकम जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदारों ने उन्हें दर्शकों के बीच खास जगह दिलाई। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था।

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मधुरेंद्र का कहना है कि नाना पाटेकर सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि अपनी कला और व्यक्तित्व से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले कलाकार थे। उनके निधन से सिनेमा और कला जगत को बड़ी क्षति हुई है। ऐसे कलाकार की याद में बनाई गई यह सूक्ष्म कलाकृति उनके प्रति सम्मान और भावनाओं को अपने आप में समेटे हुए है।

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