बिहार की राजनीति में एक अहम और दिलचस्प मोड़ सामने आ रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले हैं, जिसके बाद राज्य की सियासत में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जानकारी की पुष्टि भाजपा के प्रदेश...
बिहार: बिहार की राजनीति में एक अहम और दिलचस्प मोड़ सामने आ रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले हैं, जिसके बाद राज्य की सियासत में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जानकारी की पुष्टि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने की है। संजय सरावगी के मुताबिक, शपथ ग्रहण के बाद एनडीए का केंद्रीय नेतृत्व और खुद नीतीश कुमार मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे। इस घटनाक्रम के बाद बिहार में नई सरकार के गठन और नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चल रही चर्चाओं को भी जल्द विराम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
दरअसल, जैसे-जैसे 10 अप्रैल की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे यह सवाल भी तेज हो गया है कि राज्य की कमान अब किसके हाथों में जाएगी। राजनीतिक गलियारों में कई नामों पर मंथन जारी है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह में बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। इससे शासन-प्रशासन में नई गति और स्पष्टता आने की उम्मीद की जा रही है।
नीतीश कुमार ने साल 2005 में पहली बार बिहार की सत्ता संभाली थी और तब से लेकर अब तक, कुछ महीनों को छोड़ दें तो वे लगातार मुख्यमंत्री पद पर बने रहे हैं। ऐसे में उनका राज्यसभा जाने का फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा। हालांकि, अब वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं और उनके शपथ ग्रहण पर सबकी नजरें टिकी हैं।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि बिहार में अगला मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है। वहीं, जदयू खेमे के कुछ नेता मुख्यमंत्री के बेटे निशांत को राज्य की कमान सौंपने की मांग कर रहे हैं। उनके समर्थन में कई जगह पोस्टर भी लगाए गए हैं, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई है। फिलहाल, बिहार की राजनीति एक अहम मोड़ पर खड़ी है, जहां 10 अप्रैल के बाद तस्वीर और ज्यादा साफ होने की उम्मीद है।