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संसद के विशेष सत्र से पहले BJP का सख्त व्हिप, तीन दिन सभी सांसदों की मौजूदगी अनिवार्य

संसद का यह तीन दिवसीय विशेष सत्र कई मायनों में अहम माना जा रहा है। एक ओर जहां सरकार महिला आरक्षण जैसे बड़े मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी इस पर अपनी रणनीति बनाने में जुटा है। ऐसे में बीजेपी का सख्त व्हिप यह संकेत देता है कि सरकार इस सत्र में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं चाहती...

By हर्ष गौतम 
Updated Date

नई दिल्ली।  संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 16 से 18 अप्रैल तक होने वाले तीन दिवसीय सत्र के लिए लोकसभा और राज्यसभा के अपने सभी सांसदों को तीन-लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि इस दौरान किसी भी सांसद की गैरहाजिरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि सत्र में कई अहम मुद्दों पर चर्चा और फैसला होना है। बीजेपी द्वारा जारी व्हिप में सभी सांसदों—जिसमें केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं—को निर्देश दिया गया है कि वे तीनों दिन सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। पार्टी ने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की छुट्टी मंजूर नहीं होगी और सभी सदस्यों को लगातार सदन में मौजूद रहना होगा। तीन-लाइन व्हिप आमतौर पर बेहद महत्वपूर्ण विधायी कामकाज या मतदान के समय जारी किया जाता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार इस सत्र को लेकर पूरी तरह गंभीर है और कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहती।

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महिला आरक्षण बिल रहेगा केंद्र में, जनगणना और परिसीमन पर मंथन

इस विशेष सत्र का मुख्य फोकस नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (महिला आरक्षण बिल) से जुड़े मुद्दे होंगे। सरकार इस कानून से संबंधित कुछ अहम संशोधनों पर विचार कर रही है, जिन्हें संसद में पेश किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस बिल के लागू होने की प्रक्रिया को लेकर सरकार नई रणनीति पर काम कर रही है, ताकि इसे जल्द प्रभावी बनाया जा सके। दरअसल, इस कानून को लागू करने की शर्तें अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ी हुई थीं। लेकिन जनगणना में हो रही देरी के कारण अब सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ने के विकल्प पर विचार कर रही है। यह बदलाव अगर होता है, तो महिला आरक्षण लागू होने का रास्ता तेज हो सकता है।

सत्र को लेकर बढ़ी राजनीतिक अहमियत

संसद का यह तीन दिवसीय विशेष सत्र कई मायनों में अहम माना जा रहा है। एक ओर जहां सरकार महिला आरक्षण जैसे बड़े मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी इस पर अपनी रणनीति बनाने में जुटा है। ऐसे में बीजेपी का सख्त व्हिप यह संकेत देता है कि सरकार इस सत्र में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं चाहती। कुल मिलाकर, यह विशेष सत्र सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक और सामाजिक फैसलों की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

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