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Raksha Bandhan 2024 : रक्षा बंधन भाई-बहन के बीच प्यार और सम्मान का पर्व है , जानिए तिथि और महत्व

भाई-बहन के बीच प्यार और बंधन को समर्पित रक्षा बंधन को राखी के नाम से भी जाना जाता है। यह एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है। यह पर्व भारत के कई हिस्सों और दुनिया भर में भारतीय प्रवासियों के बीच मनाया जाता है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Raksha Bandhan 2024 : भाई-बहन के बीच प्यार और बंधन को समर्पित रक्षा बंधन को राखी के नाम से भी जाना जाता है। यह एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है। यह पर्व भारत के कई हिस्सों और दुनिया भर में भारतीय प्रवासियों के बीच मनाया जाता है। ये दिन भाई-बहन को समर्पित है। महाराष्ट्र में इसे नराली पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

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भाई-बहनों के बीच गहरे प्यार और सम्मान का प्रतीक है
‘रक्षाबंधन’ शब्द अर्थ है ‘सुरक्षा का बंधन’ है। इस दिन, बहनें अपने भाइयों की कलाई पर ‘राखी’ नामक पवित्र धागा बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र और समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। बदले में, भाई अपनी बहनों को सभी बाधाओं और परेशानियों से बचाने की कसम खाते हैं। यह त्यौहार भाई-बहनों के बीच गहरे प्यार और सम्मान का प्रतीक है और उनके बीच के बंधन को मजबूत करता है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, रक्षा बंधन श्रावण के चंद्र कैलेंडर महीने के आखिरी दिन पड़ता है। आइये जानते है रक्षाबंधन की तिथि और समय।

क्षाबंधन 2024  मुहूर्त
पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि 19 अगस्त 2024 को सुबह 03 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात 11 बजकर 55 मिनट पर इसका समापन होगा। अपराह्न का समय रक्षा बन्धन के लिये अधिक उपयुक्त माना जाता है जो कि हिन्दु समय गणना के अनुसार दोपहर के बाद का समय है। अगर अपराह्न का समय भद्रा आदि की वजह से उपयुक्त नहीं है तो प्रदोष काल का समय भी रक्षा बन्धन के संस्कार के लिये उपयुक्त माना जाता है।

भद्रा काल में राखी न बांधे
इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी, रक्षासूत्र बांधती हैं और उनकी दीर्धायु, सुख और उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों को उपहार देकर उम्रभर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। शास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार हमेशा भद्रा रहित समय में मनाया जाना चाहिए, क्योंकि भद्राकाल में मांगलिक कार्य करना वर्जित है। भद्रा काल में राखी न बांधे, इससे भाई के जीवन पर बुरा असर पड़ता है।

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