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माहवारी पर पुरुषों को संवेदनशील बनाने की घर से हो शुरुआत : स्वाती सिंह

आज की युवा पीढ़ी माहवारी जैसे विषय के प्रति बेहद जागरूक है। बच्चियां इस बारे में अपने सहेलियों से लेकर माताओं से खुलकर बात करती हैं, उन्हें पता है कि ये कोई बीमारी या शर्म का विषय नहीं है। ये जागरूकता सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है। लेकिन, अब इससे भी आगे जाने की जरूरत है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। आज की युवा पीढ़ी माहवारी जैसे विषय के प्रति बेहद जागरूक है। बच्चियां इस बारे में अपने सहेलियों से लेकर माताओं से खुलकर बात करती हैं, उन्हें पता है कि ये कोई बीमारी या शर्म का विषय नहीं है। ये जागरूकता सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है। लेकिन, अब इससे भी आगे जाने की जरूरत है। बच्चियां जब तक घर में पिता, भाई से इस बारे में खुलकर बात नहीं करेंगी, तब तक ये बदलाव अधूरा रहेगा। पूर्व मंत्री स्वाती सिंह ने शनिवार को श्री गुरुनानक गर्ल्स डिग्री कॉलेज की छात्राओं को माहवारी के विषय में कुछ इस तरह जागरूक किया।

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उन्होंने कहा कि अभी भी माहवारी के दौरान किचन में जाने पर रोक और आचार को हाथ नहीं लगाने जैसी तमाम बातें घर में कही जाती हैं। मेडिकल सांइस के इस युग में बच्चियों को इस बारे में घर में खुलकर न सिर्फ बात करनी होगी, बल्कि घर के पुरुषों को भी समझाना होगा। पुरुषों का इस विषय में संवेदनशील होना बेहद जरूरी है, तभी घर की महिलाओं को एक स्वस्थ माहौल मिल सकेगा। किसी भी बदलाव के लिए पहले खुद को बदलने की जरूरत है, जिसकी शुरुआत पहले खुद से फिर घर से होनी चाहिए। स्वाती फाउंडेशन की शुरुआत ही इस मकसद के साथ की गई है और बिना आपके इस लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा सकता।

इस दौरान स्वाती सिंह ने छात्राओं के सवालों का जवाब दिया। माहवारी के दौरान प्रिकॉशन और इचिंग को लेकर उन्होंने बताया कि सेनेटरी पैड चार से पांच घंटे में बदलना चाहिए। इचिंग होने पर डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। पीरियड्स के दौरान फेस पर पिंपल्स होने पर उन्होंने बताया कि सबका मासिक धर्म चक्र अलग-अलग होता है। पीरियड्स होना जरूरी है। नहीं होने पर समस्या हो सकती है। पिम्पल्स हार्मोनल चेंज होने की वजह से हो सकते हैं। अगर समस्या ज्यादा है तो डॉक्टर को दिखा सकते हैं। कार्यक्रम में 250 छात्राएं एवं 30 से ज्यादा टीचर्स मौजूद रहीं। स्वाती फाउंडेशन की ओर से सभी को सेनेटरी पैड का वितरण किया गया। इस दौरान प्रधानाचार्य डॉ. सुरभि जी. गर्ग, डॉ. रंजीत कौर, डॉ. प्राची भटनागर, स्वाती शुक्ला, डॉ. श्वेता शुक्ला, डॉ. दीप्ति राय आदि महिला शिक्षक शामिल रहीं।

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