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एमपी में चौकाने वाला खुलासा…गौवंश में आ रही तेजी से गिरावट

भोपाल। सूबे की डॉक्टर मोहन यादव सरकार भले ही गौवंश को संरक्षण देने पर जोर दे रही हो लेकिन बावजूद इसके प्रदेश में गौवंश में तेजी से गिरावट हो रही है। यह खुलासा हुआ है पशु गणना में। निश्चित ही यह चौकाने वाली बात ही होगी। बताया गया है कि प्रदेश में जो लोग गौवंश का पालन करते है वे अब भैंसों, मुर्गा मुर्गी और बकरी पालन में ज्यादा रूचि ले रहे है।

By Shital Kumar 
Updated Date

मध्यप्रदेश में साल दर साल भले ही दूध के उत्पादन में तेजी से वृद्धि हो रही है, लेकिन इस बीच चौंकाने वाली खबर यह है कि गौवंश में तेजी से गिरावट आ रही है। हालत यह है कि गौवंश की तुलना में प्रदेश के लोगों में भैसों, मुर्गा- मुर्गी और बकरी पालन की तरफ तेजी से रुझान बड़ा है।

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गौवंश में 43.76 प्रतिशत की कमी दर्ज

अगर बीते पांच सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गौवंश में 43.76 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यानि की हर साल करीब 9 फीसदी की दर से कमी आ रही है। प्रदेश में यह हाल तब हैं, जबकि सरकार गौवंश के नाम पर कई तरह की योजनाओं को चला रही है और तमाम जगहों पर गौ शालाओं को भी खोला जा रहा है और उन्हें सरकार की तरफ से अनुदान भी दिया जा रहा है।

सामान्य गायों की तुलना में दुधारू गौवंशों की ओर रुचि

इसमें भी अहम बात यह है कि तीन जिले ऐसे हैं जहां पर सर्वाधिक गौवंश में कमी आ रही है। इन जिलों में तो कमी की दर 12 फीसदी तक पहुंच गई है। इसकी वजह तीनों जिलों में गौवंश में पांच सालों के अंदर 60 फीसदी से अधिक तक की कमी आ चुकी है। इनमें छतरपुर, छिंदवाड़ा और पन्ना जिला शामिल है। उधर, चार जिले ऐसे हैं, जिनमें सबसे कम कमी दर्ज हुई है। इनमें खंडवा, रतलाम, शहडोल और मुरैना में अंतर सबसे कम है। पशु गणना की रिपोर्ट में गौवंशों की कम होने से विभाग की चिंता बढ़ा दी है। यह खुलासा हाल ही में किए जा रहे पशु गणना के आंकड़ों से हुआ है। पशु गणना रिपोर्ट के अनुसार पशु पालकों में सामान्य गायों की तुलना में दुधारू गौवंशों की ओर रुचि बढ़ी है। इसकी बानगी सांची प्लांट पर बढ़े उत्पादन से लिया गया है। इंदौर संभाग में खंडवा समेत अन्य जिले के सांची प्लांटों पर पिछले साल की तुलना में 8 से 10 प्रतिशत दूध का उत्पादन बढ़ा है। खंडवा सांची प्लांट पर पिछले साल 11-12 हजार लीटर उत्पादन रहा। चालू वर्ष में उत्पादन बढक़र 16-17 हजार लीटर हो गया है। इसी तरह बुरहानपुर, खरगोन समेत अन्य सीमावर्ती जिले में दूध का उत्पादन बढ़ा है। लेकिन गौवंशों की संख्या में गिरावट आई है।

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