जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में धांधली और छात्र हितों को लेकर चल रहे आंदोलन की चिंगारी अब उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में भी फैल चुकी है। आज यानी शनिवार को जिले के विभिन्न छात्र संगठनों, युवाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और व्यापक धरना-प्रदर्शन धरना-प्रदर्शन किए हैं।
गाजीपुर। जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में धांधली और छात्र हितों को लेकर चल रहे आंदोलन की चिंगारी अब उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में भी फैल चुकी है। आज यानी शनिवार को जिले के विभिन्न छात्र संगठनों, युवाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और व्यापक धरना-प्रदर्शन किए हैं।
सरजू पांडेय पार्क में जुटे प्रदर्शनकारी
इस आंदोलन में भारी संख्या में छात्र और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता शहर के सरजू पांडेय पार्क में एकत्रित हुए और प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस की कार्रवाई और लाठीचार्ज पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। छात्रों का कहना है कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। साथ ही छात्रों ने आरोप लगाया है कि भर्ती प्रणालियों की पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भी नारेबाजी करते नजर आएं।
पीजी कॉलेज में तालाबंदी और चक्काजाम
आंदोलन कर रहे छात्रों का गुस्सा उस समय और बढ़ गया जब वे स्नातकोत्तर (PG) कॉलेज पहुंचे। छात्रों ने एकजुट होकर कॉलेज के मुख्य गेटों पर ताला लगा दी और वहीं धरने पर बैठ गए। जिसके चलते कॉलेज प्रशासन और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। वहीं इस रैली के कारण शहर के मुख्य मार्गों पर कुछ समय के लिए आवागमन पूरी तरह ठप रहा।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
आपको बता दें कि गाजीपुर में हुआ यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे आंदोलन के समर्थन में किया गया है। NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक और प्रशासनिक विफलता के विरोध में युवा देश भर में अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा है। साथ ही छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक फैसला नहीं लेती है, तो इस आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा।