दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में दिल्ली कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट में इस मामले में आरापी तीन पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया है। जांच करने वाली टीम तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट में कोई साक्ष्य पेश नहीं कर पाई है। इनमें क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी और सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं।
लखनऊ। दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में दिल्ली कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट में इस मामले में आरापी तीन पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया है। जांच करने वाली टीम तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट में कोई साक्ष्य पेश नहीं कर पाई है। इनमें क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी और सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं। कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा कि दुष्कर्म पीड़िता ने पहले आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराई थी। इससे पहले पीड़िता ने किसी भी थाने में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। पीड़िता का आरोप था कि पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ पुलिस कर्मी जानबूझकर पुलिस आरोपियों पर मुकदमा दर्ज नहीं कर रही थी।
बता दे कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव दुष्कर्म मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर मामले में आरोपी बनाए गए पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में तीन पुलिस अधिकारियों को बरी कर दिया है। इनमें सफीपुर के तत्कालीन सीओ कुंवर बहादुर सिंह, तत्कालीन माखी थाना प्रभारी धर्म प्रकाश शुक्ला और सब इंस्पेक्टर दिग्विजय सिंह शामिल थे। पहली शिकायत 17 अगस्त 2017 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयंक गोयल की अदालत ने अपने आदेश में कहा पीड़िता ने 17 अगस्त 2017 को सबसे पहले आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके पहले उसने किसी भी पुलिस थाने में शिकायती पत्र नहीं दिया। इस शिकायत को प्रशासन ने पुलिस के पास जांच रिपोर्ट लगाने के लिए भेजी गई थी, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि पुलिस अधिकारियों पर जानबूझकर मुकदमा दर्ज न करने का आरोप गलत है।