UP Politics : यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ‘स्वाभिमान-शून्य’ वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि स्वाभिमान की परिभाषा सत्ता की कुर्सी से नहीं, बल्कि विचारों, सिद्धांतों और जनसेवा के प्रति समर्पण से तय होती है। इससे पहले डिप्टी सीएम ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अहंकारी बताया था। जिस पर अखिलेश ने पलटवार करते हुए उन्हें ‘स्वाभिमान शून्य’ बताया दिया और दावा किया कि डिप्टी सीएम का कई बार अपमान हुआ लेकिन वह अभी भाजपा के साथ बनें हुए हैं। इस पर मौर्य की प्रतिक्रिया सामने आयी है।
UP Politics : यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ‘स्वाभिमान-शून्य’ वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि स्वाभिमान की परिभाषा सत्ता की कुर्सी से नहीं, बल्कि विचारों, सिद्धांतों और जनसेवा के प्रति समर्पण से तय होती है। इससे पहले डिप्टी सीएम ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अहंकारी बताया था। जिस पर अखिलेश ने पलटवार करते हुए उन्हें ‘स्वाभिमान शून्य’ बताया दिया और दावा किया कि डिप्टी सीएम का कई बार अपमान हुआ लेकिन वह अभी भाजपा के साथ बनें हुए हैं। इस पर मौर्य की प्रतिक्रिया सामने आयी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बुधवार को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “अखिलेश जी, स्वाभिमान की परिभाषा सत्ता की कुर्सी से नहीं, बल्कि विचारों, सिद्धांतों और जनसेवा के प्रति समर्पण से तय होती है। मर्यादा की पहली पाठशाला परिवार होता है। मैं ख़ुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मैंने इसका अपने परिवार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा में पूरी निष्ठा से पालन किया है। लेकिन आपका ‘पारिवारिक शिष्टाचार’ जगजाहिर है। भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता संघर्ष की भट्ठी में तपकर निकलता है, वह किसी राजनीतिक खानदान की विरासत का मोहताज नहीं होता। उसके लिए पद अस्थायी होता है, लेकिन जनसेवा का संकल्प स्थायी। लेकिन परिवारवादी राजनीति के ‘नुमाइंदों’ की सोच अपने ‘कुनबे की चौखट’ तक ही सीमित होती है। उनकी सियासत कुनबे से शुरू होकर कुनबे पर ही दम तोड़ देती है।”
पूर्व अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने आगे कहा, “दरअसल, कुर्सी की इतनी फिक्र आपको इसलिए भी सता रही है, क्योंकि 2017 में हाथ से फिसली सत्ता की ‘टीस’ आज भी आपके दिलो-दिमाग पर छाई हुई है। आपकी यह टीस साल 2047 तक ऐसे ही बनी रहेगी, क्योंकि अपने कुशासन के कारण जो इतिहास के पन्नों में ‘पूर्व’ हो चुके हैं, वे अब हमेशा ‘पूर्व’ ही रहेंगे! हम सुशासन और विकास के संकल्प के साथ साल 2027 में 2017 दोहराएंगे और उत्तर प्रदेश में फिर से कमल खिलाएंगे! इसलिए स्वाभिमान की मत दीजिए दुहाई, क्योंकि 2027 में जनता करेगी प्रदेश से सपा की सफाई!”
अखिलेश जी, स्वाभिमान की परिभाषा सत्ता की कुर्सी से नहीं, बल्कि विचारों, सिद्धांतों और जनसेवा के प्रति समर्पण से तय होती है।
मर्यादा की पहली पाठशाला परिवार होता है। मैं ख़ुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मैंने इसका अपने परिवार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा में पूरी निष्ठा से पालन किया है। लेकिन आपका ‘पारिवारिक शिष्टाचार’ जगजाहिर है।
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भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता संघर्ष की भट्ठी में तपकर निकलता है, वह किसी राजनीतिक खानदान की विरासत का मोहताज नहीं होता। उसके लिए पद अस्थायी होता है, लेकिन जनसेवा का संकल्प स्थायी।
लेकिन परिवारवादी राजनीति के ‘नुमाइंदों’ की सोच अपने ‘कुनबे की चौखट’ तक ही सीमित होती है। उनकी सियासत कुनबे से शुरू होकर कुनबे पर ही दम तोड़ देती है।
दरअसल, कुर्सी की इतनी फिक्र आपको इसलिए भी सता रही है, क्योंकि 2017 में हाथ से फिसली सत्ता की ‘टीस’ आज भी आपके दिलो-दिमाग पर छाई हुई है। आपकी यह टीस साल 2047 तक ऐसे ही बनी रहेगी, क्योंकि अपने कुशासन के कारण जो इतिहास के पन्नों में ‘पूर्व’ हो चुके हैं, वे अब हमेशा ‘पूर्व’ ही रहेंगे!
हम सुशासन और विकास के संकल्प के साथ साल 2027 में 2017 दोहराएंगे और उत्तर प्रदेश में फिर से कमल खिलाएंगे!
इसलिए स्वाभिमान की मत दीजिए दुहाई,
क्योंकि 2027 में जनता करेगी प्रदेश से सपा की सफाई!पढ़ें :- अब ओवैसी ने दी चुनौती- योगी संभल से और अखिलेश गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाए, हम दोनों को हराएंगे
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) October 14, 2026