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शातिर दलालों ने यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था को किया ध्वस्त, जब फर्जी कंपनी एरोमा की निविदा हुई निरस्त, फिर कैसे मिला क्रय आदेश?

यूपी की जनता के जीवन रक्षा हेतु प्रदेश सरकार के तरफ से अरबों रूपये का बजट जीवन रक्षक उपकरणों की खरीद के लिए प्रति वर्ष आवंटित किया जाता है। परन्तु भ्रष्ट अधिकारियों और कुख्यात शातिर दलालों की मिलीभगत से वो धन लूट लिया जाता है और जनता की जीवन रक्षक उपकरणों की जगह घटिया जीवन भक्षक उपकरण मेडिकल कॉलेजों में स्थापित कर दिए जाते हैं।

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। यूपी की जनता के जीवन रक्षा हेतु प्रदेश सरकार के तरफ से अरबों रूपये का बजट जीवन रक्षक उपकरणों की खरीद के लिए प्रति वर्ष आवंटित किया जाता है। परन्तु भ्रष्ट अधिकारियों और कुख्यात शातिर दलालों की मिलीभगत से वो धन लूट लिया जाता है और जनता की जीवन रक्षक उपकरणों की जगह घटिया जीवन भक्षक उपकरण मेडिकल कॉलेजों में स्थापित कर दिए जाते हैं।

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कुख्यात शातिर दलालों ने स्वास्थ्य विभाग को जमकर लूटा और  पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त कर दी

लखनऊ की फर्म एरोमा हेल्थकेयर कागजों पर ही संचालिट होती है। मिली जानकारी के अनुसार यह फर्म संगीता कुरियाल (पत्नी मनोज कुरियाल, कर्मचारी POCT SERVICES) के नाम पर रजिस्टर्ड है। इसका संचालन शातिर जीजा साले की जोड़ी द्वारा किया जाता है। उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग के जवाहर भवन स्थित महानिदेशालय के क्रय विभाग के भ्रष्ट व लालची कर्मचारियों से सांठगांठ कर के कुख्यात शातिर दलालों ने स्वास्थ्य विभाग को जमकर लूटा और  पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त कर दी।

कुख्यात शातिर ने तीन कंपनियों (POCT SERVICES, AROMA HEALTHCARE, R. RAVI AND COMPANY AGENCIES) का गठन किया

किसी भी टेंडर की शर्त होती है कि तीन कंपनियां प्रतिभागी टेंडर में प्रतिभाग करें। भ्रष्टाचार का खेल चलता रहे। इसके लिए कुख्यात शातिर ने तीन कंपनियों (POCT SERVICES, AROMA HEALTHCARE, R. RAVI AND COMPANY AGENCIES) का गठन किया। इन्हीं के माध्यम से जीवन रक्षक उपकरणों के हर टेंडर में खेल करने लगे। यही वो तीनों कम्पनिया हैं जिनके जरिये कुख्यात शातिर दलाल जीवन रक्षक उपकरणों के टेंडर में प्रतिभाग करते हैं।

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अगर किसी अन्य कंपनी ने टेंडर में प्रतिभाग कर लिया तो उसके टेंडर को टेक्निकल बिड में ही रिजेक्ट करा दिया जाता है ताकि कुख्यात शातिर दलालों का खेल सेफ रहे। एरोमा हेल्थ केयर का महा फर्जीवाड़ा कुछ इस प्रकार से है। सहारनपुर मेडिकल कॉलेज द्वारा जीवन रक्षक उपकरण PULSE OXEMETER का टेंडर GMCS/2018/2193/MEDICINE/ANESTHESIA/SURGERY निकाला गया, जिसमें प्रतिभाग करने वाली कम्पनियां निम्नलिखित थी। POCT SERVICES, AROMA HEALTHCARE, P. RAVI AND COMPANY AGENCIES, VED MEDICAL SERVICES, AROMA INDIA, ANESTHESIA SURGURY DEPARTMENT के महत्वपूर्ण जीवन रक्षक उपकरण PULSE OXEMETER के टेंडर में P RAVI AND COMPANY AGENCIES LUCKNOW द्वारा अपने (पार्टनर्स महेश कुमार खंडेलवाल, मनोज कुमार खंडेलवाल ) डिजिटल सिग्नेचर से AROMA HEALTHCARE LUCKNOW (PROPRIETOR SANGEETA KURIYAAL) के बिड दस्तावेज उत्तर प्रदेश की सरकारी ETENDER वेबसाइट पर UPLOAD कर दिए गए।

जब सहारनपुर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य ने उक्त टेंडर को खोला । तब इस बात का खुलासा हुआ कि में P RAVI AND COMPANY AGENCIES द्वारा अपने (पार्टनर्स महेश कुमार खंडेलवाल, मनोज कुमार खंडेलवाल) डिजिटल सिग्नेचर से AROMA HEALTHCARE (PROPRIETOR SANGEETA KURIYAAL) के बिड दस्तावेज UPLOAD किये गए हैं। इस खुलासे पर AROMA HEALTHCARE LUCKNOW की तथाकथित मालकिन संगीता कुरियाल और उसके पति मनोज कुरियाल और P. RAVI AND COMPANY AGENCIES LUCKNOW के पार्टनर बाप बेटे महेश कुमार खंडेलवाल, मनोज कुमार खंडेलवाल के हाथ पैर फूल गए।

जब प्रथम स्टेज ही पूरी नहीं हुयी तो सेकंड स्टेज का रिजल्ट कैसे जारी हो गया?

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क्योंकि सारे संगठति गिरोह का खुलासा हो गया था कि किस प्रकार से चिकित्सा शिक्षा निदेशालय स्तर पर लूट और फर्ज़ीवाड़े का खेल चल रहा है। फिर सहारनपुर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य और क्रय कमेटी को मैनेज करके की निविदा निरस्त करा दी गयी। परन्तु उचित कारण बताना भूल गए, लिख दिया NOT COPLIED WITH TECHNICAL SPECIFICATIONS। परन्तु निविदा खुलने के प्रथम स्टेज जब निविदा प्रपत्र का क्रय मूल्य और प्रतिभूति कि जांच होती है उसमें कुछ अपडेट ही नहीं किया कि इसकी P. RAVI AND COMPANY AGENCIES LUCKNOW डिमांड ड्राफ्ट और एफडीआर नहीं मिली। इसलिए निविदा निरस्त की जाती है। जब इसकी P. RAVI AND COMPANY AGENCIES LUCKNOW डिमांड ड्राफ्ट और एफडीआर नहीं थी तो टेक्निकल बिड में स्पेसिफिकेशन्स कैसे चेक हुए? जब प्रथम स्टेज ही पूरी नहीं हुयी तो सेकंड स्टेज का रिजल्ट कैसे जारी हो गया? सबसे आश्चर्यजनक बात यह है की इतना फर्ज़ीवाड़े के बाद भी निविदा को पूरा किया गया और एरोमा के पक्ष में क्रय आदेश जारी किया गया।

महा निदेशालय के क्रय विभाग के भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी महानिदेशक  किंजल सिंह तक नहीं पहुंचने दे रहे हैं सच्चाई 

यूपी की तेज तर्रार आईएएस किंजल सिंह को उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग का महानिदेशक बनाया गया। तब कुछ उम्मीद जगी थी कि कुख्यात शातिर जीजा साले की भ्रष्ट जोड़ी की लूट पर कुछ लगाम लगेगी। परन्तु लगता है कि महा निदेशालय के क्रय विभाग के अधिकारी और कर्मचारी किंजल सिंह तक सच्चाई पहुंचने ही नहीं दे रहे हैं। इसलिए ईमानदार अधिकार और कर्मचारी साइड कर दिए गए हैं। देखना यह है कि चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक इस घोटाले, महा फर्ज़ीवाड़े में शामिल भ्रष्ट कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करती हैं? यह तो तय है अगर ईमानदारी से कार्रवाई हुई तो संगीता कुरियाल मालकिन AROMA HEALTHCARE LUCKNOW और उसके पति मनोज कुरियाल, महेश कुमार खंडेलवाल, मनोज कुमार खंडेलवाल पार्टनर P.RAVI AND COMPANY AGENCIES LUCKNOW और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के भ्रष्ट कर्मचारियों का जेल जाना तय है।

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