ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya of Jyotirpeeth, Swami Avimukteshwarananda Saraswati)पर लगे आरोपों से एक महिला भावुक हो गई। वह अविमुक्तेश्वरानंद के सामने फूट-फूटकर रोने लगी। इस पर शंकराचार्य ने कहा कि रोना तब आता है, जब आपका गुरु गलत निकल जाए। किसी के षड्यंत्र पर रोने की कोई जरूरत नहीं है।
वाराणसी। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya of Jyotirpeeth, Swami Avimukteshwarananda Saraswati)पर लगे आरोपों से एक महिला भावुक हो गई। वह अविमुक्तेश्वरानंद के सामने फूट-फूटकर रोने लगी। इस पर शंकराचार्य ने कहा कि रोना तब आता है, जब आपका गुरु गलत निकल जाए। किसी के षड्यंत्र पर रोने की कोई जरूरत नहीं है।
“सरकारों को जीहुजूर शंकराचार्य चाहिए, जो ये कहें वही बोले, वही करे और हम जीहुजूर शंकराचार्य नहीं बन पा रहे हैं। रोने की आवश्यकता नहीं है। रोना तब जब आपका गुरु गड़बड़ निकल जाए।”
– शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती pic.twitter.com/cFRm7OqWcu
— Krishna Kant (@kkjourno) February 23, 2026
‘सरकारों को ऐसे शंकराचार्य चाहिए, जो जी-हुजूरी करें, जो सरकार चाहे वही बोलें, जो सरकार कहे वही कहें’
महिला इशारे में कहती है कि नहीं। आपके साथ तो भगवती हैं। इस पर शंकराचार्य कहते हैं कि सरकारों को ऐसे शंकराचार्य चाहिए, जो जी-हुजूरी करें, जो सरकार चाहे वही बोलें, जो सरकार कहे वही कहें। लेकिन हम लोग जी-हुजूरी करने वाले नहीं बन पा रहे हैं। बता दें कि महिला आज सुबह शंकराचार्य का आशीर्वाद लेने पहुंची थी।
श्रद्धालु नीलम दुबे ने बताया कि हम यहीं काशी से हैं। हम लोग पूरे परिवार से, पीढ़ियों से महाराज जी के साथ जुड़े हैं। ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज थे तब से। वर्तमान शंकराचार्य के पास हमारी पूरी फैमिली आती है। हम यहां के एक अच्छे परिवार से संबंध रखते हैं। राजति पुरोहित काशी के हम लोग वंशज हैं। हम लोगों ने कभी भी या हमारे परिवारवालों ने कभी मठ के बारे में, महाराज लोगों के बारे में ऐसा नहीं सुना। महाराज जी के ऊपर निराधार आरोप लगाया जा रहा। ये घृणित कार्य हमारे मठ में कभी नहीं होगा। हम लोग दावे से कहते हैं कि हमारा मठ है। हम जैसे अपने घर को मानते हैं कि हमारा घर है, वैसे ही इस विद्या मठ को मानते हैं कि हमारा मठ है। महाराज जी बड़े सच्चे हैं। बड़े दृढ़ विश्वास के साथ महाराज जी धर्म की रक्षा के लिए आगे बढ़ते हैं। गोरक्षा की बात बंद करवाने के लिए ये आरोप लगाया गया है।
सरकार चाहती है कि हम ही धर्मचारी और सरकार हों : शंकराचार्य
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हम समय-समय पर जनता से मिलते हैं। यह सरकार चाहती है कि हम ही धर्मचारी और सरकार हों। देश में 4 शंकराचार्य हैं जो सनातन धर्म की रक्षा करते आए हैं। अब इन्होंने उन पर प्रहार करना शुरू कर दिया है। सच्चाई कभी समाप्त नहीं होती है बल्कि वह सदा बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि गौ हत्या की बंदी की आवाज उठी है और हम इस आवाज को और बुलंद करते रहेंगे। ये लोग जनता का ध्यान दूसरी ओर ले जाना चाहते हैं। देश की जनता चाहती है कि गौ माता की रक्षा हो। चारों पीठों के शंकराचार्यों से मिलकर हम गौ माता की रक्षा का यह आंदोलन चला रहे हैं।