बड़ी लापरवाही: ‘आग के ढेर’ पर जनपद अमेठी!

अमेठी। यूपी के अमेठी जिले में विभागीय उदासीनता के चलते जिले भर के पेट्रोल पंप से पेट्रोल और डीजल वाहनों के अलावा कंटेनर्स में भी भारी मात्रा में यह ले जाया जा रहा है। डीजल-पेट्रोल के खुले रूप से परिवहन किये जाने से दुर्घटनाओं की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।

जनपद के मुसाफिरखाना के मुख्य मार्गों पर जहाँ-तहाँ टेबिल पर पेट्रोल या डीजल को प्लास्टिक की एक लीटर की बॉटल्स में बिकते हुए देखा जा सकता है। इस तरह खुले में पेट्रोल-डीजल अगर बिक रहा है तो इसे नियमों की अनदेखी ही माना जायेगा। नगरवासी कहते हैं कि अब तक सड़क किनारे सब्जी फल फूल आदि बिकते देखा होगा पर मुसाफिरखाना सड़क किनारे डीजल पेट्रोल बिकते आसानी से देखा जा सकता है।

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लोगों का कहना है कि मुसाफिरखाना बाजार (दादरा मोड़ के पास) एक फ्लॉवर डेकोरेशन की दुकान पर बल्क में खुले आम पेट्रोल बेचा जा रहा है। सूत्र बताते है कि उक्त दुकानदार स्थानीय पुलिस की मोटरसाइकिल या यूं कहें कि बाज़ार में जगह-जगह पेट्रोल बम लगे हैं। रिहायशी भीड़-भाड़ वाले इलाके में खुले आम पेट्रोल डीजल बेचा जा रहा है।

इससे किसी भी समय कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। अगर कभी हादसा हुआ तो इससे बड़ी हानि की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।
इस तरह से अवैध रूप से डीजल-पेट्रोल का संग्रहण गैर कानूनी तो है ही इससे मिलावट का भी धंधा भी खूब फल फूल रहा है। बोतलों में बंद सड़क किनारे खुले में रखे पेट्रोल बेहद घातक साबित हो सकते हैं।

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छोटी सी लापरवाही या किसी की बदमाशी से तबाही मच सकती है। खास बात यह है कि इसकी जानकारी जिम्मेदारों को भी है बावजूद इसके अनदेखी की जा रही है।

एक कालाबाज़ारी यह भी

वहीं, दो पहिया वाहनों के मैकेनिकों का मानना है कि खुले में पेट्रोल बेचने वाले ज्यादा मुनाफे के लालच में थिनर मिलाते हैं इससे गाड़ी के इंजन को भारी नुकसान होता है। माइलेज पर भी जबर्दस्त असर पड़ता है। गाड़ी का पिकअप और एवरेज कम हो जाता है। इसके साथ ही साथ कॉर्बोरेटर में जल्द ही कार्बन जमता है। गाड़ी अधिक धुंआ देती है। यह धुंआ स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी हानिकारक है। ऐसे मिलावटी पेट्रोल की बिक्री पर तत्काल रोक लगाना चाहिये।

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अनदेखी कर रहा स्थानीय प्रशासन

ऐसा नहीं है कि प्रशासन के कारिंदे इस अवैध काम से अन्जान हों। प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी भी रोजाना ही ग्रामीण अंचलों का भ्रमण कर अपना यात्रा भत्ता पकाते हैं। अन्य प्रशासनिक अधिकारी उन रास्तों से गुजरते ही हैं जहाँ दुकानों और घरों के सामने टेबल पर पेट्रोल से भरी बोतलें रखी रहती हैं। लंबे समय से विभाग के दल द्वारा पेट्रोल पंप्स का औचक निरीक्षण नहीं किया गया है, जिससे लगता है कि जिले के पेट्रोल पम्पस में नियमानुसार ही काम चल रहा है।

कलेक्टर और कप्तान से जनपेक्षा

संवेदनशील जिला कलेक्टर योगेश कुमार और जिला पुलिस अधीक्षक कुन्तल किशोर से जनापेक्षा है कि इस संवेदनशील मामले में ध्यान देकर इस तरह से खुले में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल पर रोक लगाने की दिशा में प्रयास करें।

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रिपोर्ट- राम मिश्रा

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