उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) में एक बड़ी लापरवाही सुर्खियों में आ गई है। कानपुर के बिठूर इलाके में स्थित राजा नर्सिंग होम में रविवार शाम अरुण निषाद की नवजात बच्ची की वार्मर मशीन में जलने से मौत हो गई। शालू नाम की महिला ने शाम करीब 4-5 बजे एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया था। अस्पताल की नर्सों ने बच्ची को ठंड से बचाने के लिए उसे आईसीयू (ICU) की वार्मर मशीन पर रखा था।
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) में एक बड़ी लापरवाही सुर्खियों में आ गई है। कानपुर के बिठूर इलाके में स्थित राजा नर्सिंग होम में रविवार शाम अरुण निषाद की नवजात बच्ची की वार्मर मशीन में जलने से मौत हो गई। शालू नाम की महिला ने शाम करीब 4-5 बजे एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया था। अस्पताल की नर्सों ने बच्ची को ठंड से बचाने के लिए उसे आईसीयू की वार्मर मशीन पर रखा था। नर्सिंग स्टाफ मशीन चलाकर उसकी निगरानी करना भूल गया, जिससे मशीन का तापमान अत्यधिक बढ़ गया। इस तकनीकी और मानवीय लापरवाही के कारण मासूम का शरीर काला पड़ गया और उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
डॉक्टर विवेक मिश्रा और पूरा स्टाफ अस्पताल छोड़कर मौके से फरार
बच्ची के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन लापरवाही ने इसे मातम में बदल दिया। जब परिजनों ने बच्ची को देखने की जिद की, तो नर्सों ने उन्हें टाल दिया। शक होने पर परिजन जबरन आईसीयू (ICU) में घुसे तो देखा कि मासूम का सिर और हाथ बुरी तरह जल चुके थे। इस घटना के बाद अस्पताल में भारी हंगामा मच गया। स्थिति बिगड़ती देख डॉक्टर विवेक मिश्रा और पूरा स्टाफ अस्पताल छोड़कर मौके से फरार हो गया।
डीसीपी एसएम कासिम आबिदी (DCP SM Qasim Abidi) ने बताया कि बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और अस्पताल के आईसीयू को सील कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग (Health Department) को भी इस संबंध में सूचित किया गया है। पुलिस का कहना है कि परिजनों की तहरीर के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परिजनों की मांग है कि इस आपराधिक लापरवाही के जिम्मेदार लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और अस्पताल का लाइसेंस रद्द हो।
जांच के घेरे में अस्पताल प्रबंधन
यह घटना अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, एनआईसीयू प्रबंधन और डॉक्टर विवेक मिश्रा के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
कानपुर के CMO डॉ. हरिदत्त नेमी 10 लाख रुपये महीना ऊपर पहुंचाने का ऑडियो वायरल, नवजात की मौत मामले में जांच समिति बनाई
इसी बीच कानपुर के CMO डॉ. हरिदत्त नेमी (Dr. Haridutt Nemi, CMO of Kanpur) के हर माह 10 लाख रुपये महीना रिश्वत के ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। इस ऑडियो में दावा किया जा रहा है CMO डॉ. हरिदत्त नेमी हैं। हालांकि इस ऑडियो की पुष्टि hindi.pardaphash.com नहीं करता है। हाल ही में राजा अस्पताल, बिठूर (Raja Hospital, Bithoor) में एक नवजात की मौत मामले में CMO ने जांच समिति बनाई है।
बीते दिनों राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल का एक पत्र सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल
बीते दिनों राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल (Dr. Pinky Joval, Director, National Health Mission) का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। इस पत्र में कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरि दत्त नेमी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। वायरल पत्र में आरोप लगाया था कि सीएमओ डॉ. हरि दत्त नेमी (CMO Dr. Hari Dutt Nemi) अपने घोटालों को छिपाने के लिए गैर-वित्तीय अधिकारियों से वित्तीय कार्य करवा रहे हैं, जो शासनादेशों के स्पष्ट उल्लंघन के बराबर है। साथ ही, सरकार द्वारा स्वास्थ्य योजनाओं के लिए आवंटित धन का खुलेआम दुरुपयोग करने का भी दावा किया गया है। पत्र में भ्रष्टाचार के पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि सीएमओ पहले भी निलंबन का सामना कर चुके हैं और अब फिर से डॉ. नेमी एक बार चर्चा में आ गए हैं।
पत्र के वायरल होने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई
इस पत्र के वायरल होने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला पहले से चल रहे डीएम-सीएमओ विवाद (DM-CMO Dispute) से जुड़ा माना जा रहा है। गौरतलब है कि डॉ. हरि दत्त नेमी ( Dr. Hari Dutt Nemi) पहले भी विभिन्न अनियमितताओं, तबादलों में मनमानी और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों में घिर चुके हैं, जिसके चलते उन्हें निलंबित किया गया था।
स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऐसे पत्रों की जांच के लिए उच्च स्तर पर कार्रवाई शुरू हो सकती है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से इस पत्र की पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि पत्र की सत्यता पर सवाल उठाए जा रहे हैं और यह विभागीय स्तर पर जांच का विषय बन सकता है। वायरल लेटर की पुष्टि hindi.pardaphash.com नहीं करता है।