असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले सियासी माहौल काफी गरमा गया है। इस बार चुनावी बहस सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पाकिस्तान से लेकर दुबई और अमेरिका तक पहुंच गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और गौरव गोगोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी...
असम चुनाव: असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले सियासी माहौल काफी गरमा गया है। इस बार चुनावी बहस सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पाकिस्तान से लेकर दुबई और अमेरिका तक पहुंच गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और गौरव गोगोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर दुबई में संपत्ति और अमेरिका में कंपनी होने के आरोप लगाए।
इन आरोपों पर पलटवार करते हुए सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे ‘पाकिस्तानी एंगल’ से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तेमाल किया गया पूरा मैटेरियल पाकिस्तान के सोशल मीडिया ग्रुप्स से लिया गया है। सरमा के मुताबिक, पिछले 10 दिनों में पाकिस्तान के चैनलों पर असम चुनाव को लेकर 11 टॉक शो प्रसारित किए गए, जो पहले कभी नहीं हुआ।
सीएम ने दावा किया कि इन टॉक शोज में खुलकर कांग्रेस के समर्थन की बात कही गई और इसी तरह का नैरेटिव प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच में कानूनी एजेंसियों को इन तथ्यों पर भी ध्यान देना चाहिए। सरमा ने चेतावनी दी कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करना गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता में इसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है, जिसमें उम्रकैद तक शामिल हो सकती है।
इस बीच, उनकी पत्नी रिंकी भुइयां सरमा ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करा दी है। सीएम ने भरोसा जताया कि पुलिस निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई करेगी। वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा अपने आरोपों पर कायम हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या हिमंत बिस्वा सरमा इन आरोपों से साफ इनकार कर रहे हैं? खेड़ा ने कहा कि पार्टी के पास और भी सबूत हैं, जिन्हें धीरे-धीरे सामने लाया जाएगा।
उन्होंने यह भी पूछा कि अगर दुबई की संपत्ति मौजूद है, तो उसे चुनावी हलफनामे में क्यों नहीं दिखाया गया। खेड़ा ने साफ किया कि जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलता, कांग्रेस इस मुद्दे को उठाती रहेगी। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में क्या निष्कर्ष निकालती हैं और इसका असर असम चुनाव के नतीजों पर कितना पड़ता है।