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स्मारक घोटाला: अफसर और नेताओं ने दी लूट की छूट, सोने के भाव खरीदा गया ​मीरजापुर का ‘गुलाबी पत्थर’

बसपा सरकार में स्मारक घोटाले में लूट खसोट करने वाले नेताओं और अफसरों की काली करतूत उजागर होने लगी है। ऐसे नेता और अफसर अब जांच एजेंसी की रडार पर हैं। 1400 करोड़ के स्मारक घोटाले में तत्कालीन मंत्री की भूमिका भी सामने आ रही है। सूत्रों की माने तो अफसरों ने तत्कालीन मंत्री समेत अन्य नेताओं के इशारों पर ही सरकारी खजाने के 1400 करोड़ रुपये का बंदरबांट किया है।

By मुनेंद्र शर्मा 
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Commemorative Scam Officers And Leaders Give Loot Exemption Gold Price Purchased Pink Stone Of Mirzapur

लखनऊ। बसपा सरकार में स्मारक घोटाले में लूट खसोट करने वाले नेताओं और अफसरों की काली करतूत उजागर होने लगी है। ऐसे नेता और अफसर अब जांच एजेंसी की रडार पर हैं। 1400 करोड़ के स्मारक घोटाले में तत्कालीन मंत्री की भूमिका भी सामने आ रही है। सूत्रों की माने तो अफसरों ने तत्कालीन मंत्री समेत अन्य नेताओं के इशारों पर ही सरकारी खजाने के 1400 करोड़ रुपये का बंदरबांट किया है।

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दरअसल, मीरजापुर के गुलाबी पत्थर की खरीद में ही ज्यादातर खेल किया गया है। विजिलेंस ने इस घोटाले में शामिल चार लोगों को हाल में ही जेल भेजा है, उन पर सैंड स्टोन की दरों में खेल करने का आरोप था। इसके अलावा विजिलेंस जिन लोगों के नाम चार्जशीट में शामिल करने जा रही है, उनमें ज्यादार लोगों पर पत्थरों की दरों में हेरफेर करने का आरोप है।

सूत्रों की माने तो जिन नेताओं के इशारों पर ये सब खेल हुआ है वह अभी कार्रवाई से बाहर हैं। विजिलेंस की जांच में सामाने आया है कि, नौ जुलाई 2007 को तत्कालीन खनन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने मीरजापुर सैंड स्टोन के गुलाबी पत्थरों को स्मारकों में लगाने के लिए निर्देश दिए थे।

इसके बाद 18 जुलाई को दर निर्धारण करने के लिए गठित संयुक्त क्रय समिति की बैठक हुई, जिसमें उप्र राजकीय निर्माण निगम के अपर परियोजना प्रबंधक राकेश चंद्रा, एके सक्सेना, इकाई प्रभारी के आर सिंह, सहायक स्थानिक अभियंता राजीव गर्ग शामिल थे।

समिति ने मीरजापुर सैंड स्टोन के ब्लॉक क्रय किए जाने के लिए कंसोटियम बनाकर 150 रुपये प्रति घन फुट व लोडिंग के लिए बीस रुपये प्रति घन फुट की दर से आपूर्ति के रेट तय कर दिए। इन दरों के अलावा रॉयल्टी और ट्रेड टैक्स का अतिरिक्त भुगतान करने का निर्णय भी लिया गया। जबकि इनका बाजार मूल्य 50 से 80 रुपये से अधिक नहीं था।

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दरों के निर्धारण के लिए हुई थी बैठक
मरीजापुर के गुलाबी पत्थरों के दर को निर्धारण करने के लिए 28 फरवरी 2009 को बैठक हुई जिसमें निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक एसपी गुप्ता, पीके जैन, एसके अग्रवाल, आरके सिंह, बीडी त्रिपाठी, राकेश चंद्रा, मुकेश कुमार, एके सक्सेना, हीरालाल, एसके चौबे के अलावा इकाई प्रभारी एसपी सिंह, एसके शुक्ला और मुरली मनोहर मौजूद थे। वहीं मंडलायुक्त लखनऊ के स्तर पर दरों के निर्धारण के लिए निर्माण निगम के तत्कालीन एमडी पीपी सिंह शामिल थे।

 

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