मध्य पूर्व में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए भारत के विमानन नियामक, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइंस के लिए एक महत्वपूर्ण यात्रा सलाह जारी की है। डीजीसीए ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एयरलाइंस को पश्चिम एशिया के 11 हवाई क्षेत्रों से उड़ान भरने से बचने के लिए कहा है।
DGCA advisory : मध्य पूर्व में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए भारत के विमानन नियामक, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइंस के लिए एक महत्वपूर्ण यात्रा सलाह जारी की है। डीजीसीए ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एयरलाइंस को पश्चिम एशिया के 11 हवाई क्षेत्रों से उड़ान भरने से बचने के लिए कहा है। एयरलाइंस से पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी क्षेत्रों में जोखिमों का हवाला देते हुए 11 हवाई क्षेत्रों से बचने का आग्रह किया। इसने यह भी कहा कि यह सलाह 28 मार्च, 2025 तक वैध रहेगी। इन क्षेत्रों में बहरीन, ईरान, इराक, इज़राइल, जॉर्डन, कुवैट, लेबनान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) प्रमुख संघर्ष क्षेत्र : ईरान, इज़राइल, लेबनान और इराक शामिल है।
इस सलाह के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान में लक्ष्यों के खिलाफ हाल ही में किए गए सैन्य हमलों ने नागरिक उड्डयन के लिए उच्च जोखिम वाला वातावरण बना दिया है, और तेहरान के जवाबी उपायों से क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र पर और अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
विमानन नियामक संस्था ने कई खतरों की चेतावनी भी दी, जिनमें अमेरिकी और इजरायली संपत्तियों पर संभावित हमले शामिल हैं, जो न केवल ईरानी हवाई क्षेत्र बल्कि पड़ोसी देशों को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसने चल रहे सैन्य अभियानों से बढ़ते जोखिमों का उल्लेख किया और परिचालन त्रुटियों की संभावना पर भी चिंता जताई।
यात्रियों पर प्रभाव
इस चेतावनी से कई भारतीय एयरलाइंस प्रभावित हुई हैं। इसके चलते कई उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं और मार्गों में बदलाव करना पड़ा है। साथ ही, भारत और यूरोप, उत्तरी अमेरिका तथा मध्य पूर्व के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यात्रा का समय भी बढ़ गया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों ने भी हवाई यात्रा के समग्र अनुभव को प्रभावित किया है।