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मिसाइलें रखने को अंडरग्राउंड जगह बना रहा ड्रैगन, सैन्य ताकतों को कर रहा मजबूत

By शिव मौर्या 
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वाशिंगटन। अमेरिका और चीन सशस्त्र संघर्ष की ओर आगे बढ़ रहे हैं इस बात का कोई संकेत तो नहीं मिल रहा है। लेकिन व्यापार से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक कई मुद्दों पर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। ऐसे में चीन अमेरिका से बढ़ते टकराव का मुकाबला करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका अपने नए परमाणु शस्त्रागार के निर्माण के लिए आगामी दो दशक में सैकड़ों अरबों डॉलर खर्च को न्यायोचित ठहराने के लिए चीन के परमाणु आधुनिकीकरण का हवाला देता रहा है।

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इसी बीच अमेरिका ने सैटलाइट तस्वीरों के जरिए चीन की पोल खोलने का काम किया है। अमेरिकी सैटलाइट तस्वीरों के मुताबिक चीन मिसाइलों को रखने के लिए अंडरग्राउंड फैसिलिटी तैयार करने में जुटा है। अमेरिका ने सैटलाइट इमेज के लिए खुलासा किया है कि चीन 16 नई फैसिलिटीज तैयार करने में जुटा है, जहां मिसाइलें रखी जाएंगी। चीन भूमिगत साइलो से नई परमाणु मिसाइलों के प्रक्षेपण की क्षमता विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

इसका मकसद कोई भी परमाणु हमला होने की सूरत में फौरन जवाबी कार्रवाई करने की अपनी क्षमता में सुधार लाना है। इस बात की जानकारी दी है फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट से जुड़े हैंस क्रिस्टेनसन ने जो लंबे अरसे से अमेरिका, रूस और चीन की परमाणु ताकत पर नजर रख रहे हैं। पेंटागन ने क्रिस्टेनसन के विश्लेषण पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है लेकिन उसने चीनी सैन्य विकास पर पिछली गर्मियों में अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि बीजिंग अपने परमाणु बलों की शांतिकाल में तत्परता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

 

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