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यूपी अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद पर पूर्व मंत्री मोहसिन रजा की ताजपोशी, 2027 चुनाव से पहले BJP ने चला बड़ा दांव

पी में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। करीब दो साल से खाली पड़े राज्य अल्पसंख्यक आयोग के गठन की प्रक्रिया अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद तेजी पकड़ती दिखाई दे रही है। आयोग के अध्यक्ष पद पर पूर्व मंत्री मोहसिन रजा (Chairman of the UP Minorities Commission Mohsin Raza)  की ताजपोशी कर दी गई है।

By santosh singh 
Updated Date

लखनऊ। यूपी में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। करीब दो साल से खाली पड़े राज्य अल्पसंख्यक आयोग के गठन की प्रक्रिया अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद तेजी पकड़ती दिखाई दे रही है। आयोग के अध्यक्ष पद पर पूर्व मंत्री मोहसिन रजा (Chairman of the UP Minorities Commission Mohsin Raza)  की ताजपोशी कर दी गई है। सरकार की ओर से आयोग के अध्यक्ष और 8 सदस्यों के नामों को लेकर नए सिरे से प्रस्ताव भेजा गया है।

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आयोग के गठन को केवल प्रशासनिक नियुक्ति के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी सरकार की ओर से अल्पसंख्यक समुदायों के बीच अपनी पहुंच और प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कवायद के रूप में इसे देखा जा रहा है। मोहसिन रजा पहले भी योगी सरकार में मंत्री रह चुके हैं और अल्पसंख्यक मामलों पर पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे हैं।

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2024 में खत्म हो गया था आयोग का कार्यकाल

प्रदेश सरकार ने जून 2021 में अशफाक सैफी को राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। उनके साथ आयोग में सात सदस्यों की भी नियुक्ति हुई थी। 29 जून 2024 को अशफाक सैफी का कार्यकाल समाप्त हो गया। इसके बाद नियुक्त किए गए सदस्य परविंदर सिंह का कार्यकाल भी अगस्त 2024 में पूरा हो गया। इसके बाद आयोग में नई नियुक्तियां नहीं होने से लंबे समय तक पद खाली पड़े रहे। इसी को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के अधिकारियों से जवाब मांगा और आयोग के गठन को लेकर सख्त रुख अपनाया।

HC की सख्ती के बाद सरकार की कवायद

हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई सितंबर के तीसरे सप्ताह में प्रस्तावित है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अदालत के रुख और मामले की जानकारी दी। इसके बाद आयोग के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।विभाग की ओर से अध्यक्ष और सात सदस्यों के नामों का प्रस्ताव पहले भी भेजा गया था, लेकिन पत्रावली उच्च स्तर से वापस आ गई। अब नए सिरे से प्रस्ताव भेजे जाने की बात सामने आई है। पूर्व मंत्री मोहसिन रजा को अध्यक्ष बनाए जाने पर सैद्धांतिक सहमति बनती नजर आ रही है।

कई अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व

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सरकार की तैयारी आयोग में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की भी है। इसमें जैन, बौद्ध, सिख और पारसी समाज समेत अलग-अलग वर्गों को स्थान मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे आयोग के गठन को व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक तौर पर यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे जोर पकड़ रही हैं। ऐसे समय में अल्पसंख्यक आयोग जैसे संवैधानिक निकाय में नियुक्तियां भारतीय जनता पार्टी सरकार के लिए सामाजिक समीकरण साधने और अल्पसंख्यक वर्गों तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने का माध्यम बन सकती हैं।

2027 से पहले राजनीतिक संदेश देने की तैयारी?

मोहसिन रजा को आयोग की कमान सौंपे जाने की चर्चा के बीच राजनीतिक गलियारों में इसे भारतीय जनता पार्टी की अल्पसंख्यक नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। रजा लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के साथ अल्पसंख्यक राजनीति का चेहरा रहे हैं। ऐसे में उन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने से सरकार एक ओर हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन की दिशा में आगे बढ़ेगी, तो दूसरी ओर राजनीतिक स्तर पर भी संदेश देने की कोशिश होगी। अब निगाहें सरकार के अंतिम फैसले पर हैं। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो करीब दो साल से निष्क्रिय पड़े आयोग को नया अध्यक्ष और सदस्य मिल सकेंगे। इसके बाद आयोग अल्पसंख्यकों के हितों, शिकायतों और कल्याण से जुड़े मामलों पर सरकार को सुझाव देने की भूमिका में सक्रिय हो सकेगा।

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