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कोविशील्ड की दो वैक्सीन के अंतराल को कम कर सकती है सरकार, ये है बड़ी वजह

केंद्र सरकार ऑक्सफोर्ड-ऐस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतराल घटाने पर एक बार फिर गंभीरता से विचार कर रही है। अब कोरोना के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ऑक्सफोर्ड-ऐस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतराल घटाने पर एक बार फिर गंभीरता से विचार कर रही है। अब कोरोना के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

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बता दें कि देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में तबाही मचाने वाले डेल्टा वैरिएंट ने अब नया रूप धारण कर लिया है। इसको देखते हुए कोविड टीकाकरण की रणनीति से जुड़े सरकार के विशेषज्ञ इसे लेकर कई दौर की बैठकें भी कर चुके हैं। जिनको सबसे अधिक खतरा है। उनको कम अंतराल पर टीका दिया जा सके। हाल ही में सबूत मिले हैं कि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट की वजह से अस्पतालों में भर्ती होने और संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बढ़ रहा है। कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतराल घटाने से इस वैरिएंट की चपेट में आने से लोगों को बचाया जा सकता है।

13 मई को बढ़ाया था दो डोज के बीच अंतराल

बता दें कि इससे पहले 13 मई को ही केंद्र सरकार ने कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच के अंतराल को बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया था। इसको लेकर ब्रिटेन के डेटा का हवाला दिया गया था, लेकिन तीन दिन बाद ही ब्रिटेन ने खुद अंतराल घटाकर 12 से 8 हफ्ते कर दिया है। डेल्टा वैरिएंट के खतरे को भांपते हुए यह अंतराल 50 या उससे ज्यादा आयु के लोगों के लिए घटाया गया है। ब्रिटेन में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट फिर से फैलने लगा है।

ब्रिटेन ने घटाया दो डोज के बीच का अंतराल

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ब्रिटेन के सोमवार को जारी किए आंकड़ों के मुताबिक, जिन लोगों ने ऑक्सफोर्ड-ऐस्ट्राजेनेका के टीके की दोनों खुराकें ले ली हैं। उन्हें अस्पतालों में भर्ती नहीं होना पड़ा। जबकि जिन लोगों ने सिर्फ एक खुराक ली है, उन लोगों में अस्तापताल में भर्ती होने की आशंका ज्यादा रही। सोमवार को ही ब्रिटेन में टीके के बीच का अंतराल 40 साल से ज्यादा उम्र वालों के लिए भी घटा दिया गया।

12 से घटाकर 8 हफ्ते करने पर हो रहा विचार

अब भारत में भी विशेषज्ञ सरकार से कोविशील्ड की दो खुराकों के अंतराल को घटाने के लिए कह रहे हैं। डेल्टा वैरिएंट को ही यहां भी सबसे खतरनाक स्ट्रेन माना जा रहा है। पहचान उजागर न करने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि 8 हफ्ते के अंतराल पर विचार चल रहा है। एक बार फैसला होने पर यह मामला नेशनल ग्रुप ऑन वैक्सीन ऐडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19 के पास जाएगा।

वैक्सीन को लेकर कोविड वर्किंग ग्रुप के चेयरमैन डॉ. एनके अरोड़ा ने बताया कि ‘हम अंतराल की समीक्षा करने को तैयार हैं। यह एकदम गलतफहमी है कि हम अंधे होकर पश्चिम का अनुसरण कर रहे हैं। सच यह है कि हम वैक्सीन से जुड़े फैसले लेने के लिए तमाम देशों में हो रहे अध्ययनों पर ध्यान दे रहे हैं। हम भारत में 4 हफ्ते के अंतराल पर टीका दे रहे थे, जब ब्रिटेन में यह अंतराल 12 हफ्ते था। इसलिए लोगों को लगा कि हमने ब्रिटेन के पीछे-पीछे चलकर अंतराल बढ़ाया, लेकिन हमारे फैसले उन आंकड़ों पर होते हैं, जो हमारे लोगों के लिए सबसे बेहतर हों।

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