हरियाणा के वरिष्ठ दलित IPS अधिकारी, ADGP वाई. पूरन कुमार की मजबूरन आत्महत्या का मामला स्तब्ध करने वाला भी है, दुखदायी भी और हृदय विदारक भी। परिवार को मेरी संवेदनाएं। क्या हरियाणा की भाजपा सरकार का सिस्टम इतना कमजोर या पूर्वाग्रह से ग्रस्त है कि एक ADGP रैंक के दलित IPS अधिकारी को भी न सुनवाई मिलती और न न्याय?
नई दिल्ली। हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या के मामले में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला का बयान आया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, हरियाणा के वरिष्ठ दलित IPS अधिकारी, ADGP वाई. पूरन कुमार की मजबूरन आत्महत्या का मामला स्तब्ध करने वाला भी है, दुखदायी भी और हृदय विदारक भी। परिवार को मेरी संवेदनाएं। क्या हरियाणा की भाजपा सरकार का सिस्टम इतना कमजोर या पूर्वाग्रह से ग्रस्त है कि एक ADGP रैंक के दलित IPS अधिकारी को भी न सुनवाई मिलती और न न्याय?
उन्होंने आगे लिखा, यह कड़वा सत्य है कि पिछले ग्यारह वर्षों में विशेषत: दलित अधिकारियों और कर्मियों को भेदभावपूर्ण तरीके से दरकिनार भी किया गया है और अपमानित भी। आज भी याद है कि भाजपा के एक वरिष्ठ मंत्री ने किस प्रकार से एक दलित महिला IPS अधिकारी को सार्वजनिक तरीके से अपमानित किया था।
हरियाणा के वरिष्ठ दलित IPS अधिकारी, ADGP श्री याई. पूरन कुमार की मजबूरन आत्महत्या का मामला स्तब्ध करने वाला भी है, दुखदायी भी और हृदय विदारक भी। परिवार को मेरी संवेदनाएं।
क्या हरियाणा की भाजपा सरकार का सिस्टम इतना कमजोर या पूर्वाग्रह से ग्रस्त है कि एक ADGP रैंक के दलित IPS… pic.twitter.com/o3komBAITd
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) October 9, 2025
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अंबाला जिले में एक दलित महिला भाजपा विधायक को किस प्रकार से भाजपा के लोगों ने धमकी दी थी और उसे सुरक्षा की गुहार लगानी पड़ी थी, या फिर भाजपा के एक दलित विधायक को हिसार में स्वतंत्रता दिवस पर मंच पर न बैठने दे, अपमानित किया गया था। हालांकि, CM नायब सैनी चुप्पी साधें हैं, उम्मीद है कि चण्डीगढ़ प्रशासन व देश का गृह मंत्रालय ADGP वाई. पूरन कुमार की आईएएस अधिकारी पत्नी की बात सुनेगा और न्याय देगा।
वहीं, वाई पूरण कुमार की मौत के मामले में उनकी पत्नी और हरियाणा कैडर की आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर डीजीपी और अन्य शीर्ष अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मांग की है कि आत्महत्या नोट में नामित सभी आरोपियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर उन्हें निलंबित और गिरफ्तार किया जाए, ताकि जांच निष्पक्ष हो सके।