Health & Lifestyle: आज के इस बदलते दौर में इंसानों की आदतों, रहन-सहन, शौक सबमें काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का एक अभिन्न अंग बन चुका है। दिनभर में हम कई बार अपने फोन की स्क्रीन को देखते रहते हैं। यहाँ तक की आजकल ज्यादातर लोग समय देखने के लिए भी फोन का इस्तेमाल ही करते हैं, भले ही उनके हाथ में समय देखने के घड़ी हो। इस बात से तो आप भी परिचित होंगे कि जिस चीज को हम बार-बार देखते हैं वह अक्सर हमारे दिमाग में घूमने लगती है। ऐसे में फोन का वालपेपर हमारे दिमाग पर गहरा असर डालता है।
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डार्क, हाॅरर और उदासी भरे वालपेपर का न करें प्रयोग
आज के समय में मोबाइल केवल बात करने और सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर हमारी निजी जिंदगी से भी काफी जुड़ाव रखता है। अक्सर हम देखते हैं कि अलग-अलग फोन में कई प्रकार के वालपेपर लगे होते हैं। किसी को डार्क स्क्रीन वाले वालपेपर पसंद होते हैं तो किसी को उदासी से भरे हुए और कुछ लोग तो डरावनी वालपेपर को अपने मोबाइल डिस्पले पर लगाने के शौकीन होते हैं। लेकिन इस प्रकार के वालपेपर हमारे दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। बार-बार इस प्रकार के वालपेपर को देखने से दिमाग में निगेटिव हार्मोंन्स को बढावा मिलता है , जिससे इंसान धीरे-धीरे परेशान रहने लगता है, उसके अंदर बेचैनी बढ़ने लगती है और वह चिड़चिड़ेपन का शिकार होने लगता है।
ज्यादातर ऐसा देखने को मिल जाता है, अगर आप किसी ऐसे इंसान से मिलते हैं जिसका ब्रेकअप हुआ हो तो आपको जरूर देखने को मिलेगा कि उसके फोन का वालपेपर ब्रोकेन हर्ट वाला ,उदासी से भरा हुआ या अकेलेपन वाला लगा मिलेगा, ज्यादातर ऐसा देखने को मिल जाता है। लेकिन अगर आप ऐसा करते हैं तो आपकी उदासी, आपका दुख दिमाग पर हावी होने लगेगा।
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इतना ही नहीं , ज्यादा रंगबिरंगी या भारी टेक्सट वाले वालपेपर लगाने से हमारे आंखों पर दबाव पड़ता है साथ ही ऐसे वालपेपर फोन की बैटरी भी तेजी से खत्म करते हैं।
एजुकेशनिस्ट्स और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, दिन में सैकड़ों बार मोबाइल स्क्रीन देखने से उसके वॉलपेपर हमारे मन को बहुत प्रभावित करते हैं। ऐसे में अच्छे वालपेपर अपने फोन में लगाये जिससे आपका दिल, दिमाग और मन को सकारात्मकता मिले।
रिपोर्ट: कल्पना पाण्डे