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अब सिल्वर की हॉलमार्किंग अनिवार्य करने की तैयारी, धोखाधड़ी के मामले होंगे कम : मंत्री प्रल्हाद जोशी

सोने के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग (Hallmarking of Gold Mandatory) व्यवस्था साल 2019 में लागू हुई। उससे पहले शुद्ध सोना खरीदना काफी मुश्किल होता था। कई बार ग्राहकों को शुद्ध सोने के नाम नकली सोना बेच दिया जाता है। अब चांदी खरीदने में यही समस्या देखने को मिलती है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। सोने के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग (Hallmarking of Gold Mandatory) व्यवस्था साल 2019 में लागू हुई। उससे पहले शुद्ध सोना खरीदना काफी मुश्किल होता था। कई बार ग्राहकों को शुद्ध सोने के नाम नकली सोना बेच दिया जाता है। अब चांदी खरीदने में यही समस्या देखने को मिलती है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों की चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। यह एक लाख प्रति किलो के पार भी पहुंच गई थी। इससे नकली चांदी बिकने के मामलों में भी तेजी आई। सरकार इसे रोकने के लिए सिल्वर हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने की तैयारी कर रही है।

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चांदी हॉलमार्किंग पर सरकार का रुख

खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी (Food and Consumer Affairs Minister Pralhad Joshi) का कहना है कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को उपभोक्ताओं की मांग के बाद चांदी और चांदी की कलाकृतियों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग (Hallmarking Mandatory) लागू करने पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने सोमवार को 78वें बीआईएस स्थापना दिवस समारोह (78th BIS Foundation Day Celebration) में कहा कि चांदी की हॉलमार्किंग (Hallmarking of Silver) के लिए उपभोक्ताओं की मांग है। बीआईएस को इस पर विचार-विमर्श करके उचित फैसला लेना चाहिए। सरकार का मानना है कि सिल्वर हॉलमार्किंग अनिवार्य (Hallmarking of Silver Mandatory) होने से चांदी की बिक्री में धोखाधड़ी के मामले कम होंगे।

सोने की हॉलमार्किंग है अनिवार्य

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सरकार ने फिलहाल सिर्फ सोने के आभूषणों और कलाकृतियों के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य कर रखी है। इसकी शुद्धता को 24, 22, 18 और 14 कैरेट में बांटा गया है। 24 कैरेट का गोल्ड सबसे शुद्ध माना गया है। हॉलमार्किंग का मकसद उपभोक्ता हितों की रक्षा करना और उत्पाद की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना है।

मौजूदा हॉलमार्किंग सिस्टम में एक यूनीक छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड (HUID) शामिल है, जो सोने की शुद्धता को प्रमाणित करता है। अगर चांदी की हॉलमार्किंग अनिवार्य होती है, तो इसकी गुणवत्ता को सुनिश्चित करने में काफी मदद मिलेगी।

चांदी की हॉलमार्किंग में क्या है दिक्कत ?

सरकार काफी समय से चांदी की हॉलमार्किंग अनिवार्य (Hallmarking of Silver Mandatory) करना चाहती है, लेकिन इसमें एक समस्या है। दरअसल, चांदी में सोने की तरह कैरेट नहीं होता है। इसके चलते चांदी की हॉलमार्किंग (Hallmarking of Silver) करना आसान नहीं है। यही वजह है कि बीआईएस (BIS)  ने अभी तक चांदी की हॉलमार्किंग के बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। हालांकि, सरकार के हालिया रुख के बाद बीआईएस (BIS) चांदी की हॉलमार्किंग (Hallmarking of Silver)  से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करना शुरू कर सकता है। इससे जल्द ही सिल्वर हॉलमार्किंग (Hallmarking of Silver)  शुरू होने की संभावना रहेगी।

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