1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. पश्चिम एशिया में जारी जंग जल्द खत्म होने की उम्मीदों के बीच तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा भाव

पश्चिम एशिया में जारी जंग जल्द खत्म होने की उम्मीदों के बीच तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा भाव

पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी जंग जल्द खत्म होने की उम्मीद जगी है। इसका वैश्विक बाजार (Global Markets) में कच्चे तेल की कीमतों साफ देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (International Benchmark Brent Crude) बुधवार को 15 फीसदी से अधिक गिरकर 99.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो एक सप्ताह का निचला स्तर है।

By santosh singh 
Updated Date

Crude Oil : पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी जंग जल्द खत्म होने की उम्मीद जगी है। इसका वैश्विक बाजार (Global Markets) में कच्चे तेल की कीमतों साफ देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (International Benchmark Brent Crude) बुधवार को 15 फीसदी से अधिक गिरकर 99.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो एक सप्ताह का निचला स्तर है।

पढ़ें :- Global Politics: मक्का रक्षा समझौते से बदले पश्चिम एशिया के समीकरण, भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

इससे पहले मंगलवार रात ब्रेंट क्रूड 118.35 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। बाजार में यह गिरावट उस समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के इस बयान से राहत की उम्मीद जगी कि मौजूदा संघर्ष दो से तीन हफ्तों में खत्म हो सकता है। ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों में सकारात्मक संकेत गए, जिससे तेल समेत वैश्विक बाजारों (Global Markets) में राहत भरी तेजी देखने को मिली और कीमतों में गिरावट आई।

क्यों आई गिरावट?

कीमतों में यह अचानक गिरावट भू-राजनीतिक मोर्चे पर आए नए संकेतों के बाद देखने को मिली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अगले दो से तीन हफ्तों में कम हो सकता है। साथ ही, यह भी संकेत मिले कि ईरान कुछ शर्तों के तहत तनाव कम करने को तैयार हो सकता है। इन संकेतों के बाद बाजार में बने रिस्क प्रीमियम में कमी आई। जिन निवेशकों ने कीमतों में तेजी पर दांव लगाया था, उन्होंने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।

जोखिम अभी भी बरकरार

पढ़ें :- डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने दिया इस्तीफा, जानें 28 साल की उम्र में वो कैसे पहुंची इतनी ऊंचाई तक?

हालांकि कीमतों में आई इस गिरावट के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अहम संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है और यहां किसी भी तरह का व्यवधान कीमतों को फिर तेजी से ऊपर ले जा सकता है। इसके अलावा, अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से मिल रहे मिले-जुले आर्थिक संकेतों ने भी बाजार को अस्थिर बना रखा है, जिससे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं कीमतें

विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा गिरावट को एक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतें मार्च के अधिकांश समय में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही हैं। व्यापक दृष्टिकोण से देखें तो आपूर्ति संबंधी चिंताएं और भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी भी बाजार को सहारा दे रही हैं।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...