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4 अप्रैल को है शीतला अष्टमी, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा

शीतला अष्टमी इस साल 4 अप्रैल को मनाई जाने वाली है। वैसे इसे बसौड़ा पूजा भी कहते हैं। आप सभी को बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार, शीतला माता की पूजा हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की जाती है।

By आराधना शर्मा 
Updated Date

नई दिल्ली: शीतला अष्टमी इस साल 4 अप्रैल को मनाई जाने वाली है। वैसे इसे बसौड़ा पूजा भी कहते हैं। आप सभी को बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार, शीतला माता की पूजा हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की जाती है। यह वह दिन है जब घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। शीतला अष्टमी के दिन लोग माता शीतला को बासी खाने का भोग लगाते हैं। अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं शीतला अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त और कथा।

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शीतला अष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त

  • 06:08 AM से 06:41 PM तक।
  • अवधि – 12 घण्टे 33 मिनट।
  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 04, 2021 को 04:12 AM बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त – अप्रैल 05, 2021 को 02:59 AM बजे।

शीतला माता की कथा

एक पौराणिक कथा के अनसुसार, एक दिन बूढ़ी औरत और उसकी दो बहुओं ने शीतला माता का व्रत रखा। मान्यता के मुताबिक अष्टमी के दिन बासी चावल माता शीतला को चढ़ाए व खाए जाते हैं। लेकिन दोनों बहुओं ने सुबह ताजा खाना बना लिया। क्योंकि हाल ही में दोनों की संताने हुई थीं, इस वजह से दोनों को डर था कि बासी खाना उन्हें नुकसान ना पहुंचाए। सास को ताजे खाने के बारे में पता चला तो उसने नाराजगी जाहिर की। कुछ समय बाद पता चला कि दोनों बहुओं की संतानों की अचानक मृत्यु हो गई है। इस बात को जान सास ने दोनों बहुओं को घर से बाहर निकाल दिया।

शवों को लेकर दोनों बहुएं घर से निकल गईं। बीच रास्ते वो विश्राम के लिए रूकीं। वहां उन दोनों को दो बहनें ओरी और शीतला मिली। दोनों ही अपने सिर में जूंओं से परेशान थी। उन बहुओं को दोनों बहनों को ऐसे देख दया आई और वो दोनों के सिर को साफ करने लगीं। कुछ देर बाद दोनों बहनों को आराम मिला। शीतला और ओरी ने बहुओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि तुम्हारी गोद हरी हो जाए।

ये बात सुन दोनों बुरी तरह रोने लगीं और उन्होंने महिला को अपने बच्चों के शव दिखाए। ये सब देख शीतला ने दोनों से कहा कि उन्हें उनके कर्मों का फल मिला है। ये बात सुन वो समझ गईं कि शीतला अष्टमी के दिन ताजा खाना बनाने के कारण ऐसा हुआ है।
ये सब जान दोनों ने माता शीतला से माफी मांगी और आगे से ऐसा ना करने को कहा। इसके बाद माता ने दोनों बच्चों को फिर से जीवित कर दिया। इस दिन के बाद से पूरे गांव में शीतला माता का व्रत धूमधाम से मनाए जाने लगा।

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