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ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार : बत्रा हॉस्पिटल के निदेशक, बोले- पता नहीं देश कौन चला रहा है?

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर का कहर जारी है। देश में कोरोना मरीजों की संख्या से बढ़ने से ऑक्सीजन संकट गहराता जा रहा है। शनिवार को दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी से 12 मरीजों की मौत हुई है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

Outcry Over Oxygen Director Of Batra Hospital Said I Do Not Know Who Is Running The Country

नई दिल्ली। देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर का कहर जारी है। देश में कोरोना मरीजों की संख्या से बढ़ने से ऑक्सीजन संकट गहराता जा रहा है। शनिवार को दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी से 12 मरीजों की मौत हुई है। जबकि सोमवार को कर्नाटक के अस्पताल में ऑक्सीजन की किल्लत से 24 मरीज जान गंवा बैठे है। चारों तरफ ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार का माहौल बना हुआ है। इस संकट पर दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल के निदेशक ने कहा कि मुझे नहीं पता कि यह देश कौन चला रहा है?

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पिछले 14 महीनों में क्या कर रही थी सरकार?

बत्रा हॉस्पिटल के चिकित्सा निदेशक डॉ. एससीएल गुप्ता ने देश में ऑक्सीजन संकट पर कहा कि यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी है। मरीज मर रहे हैं क्योंकि हमारे पास ऑक्सीजन नहीं है। कोरोना वायरस का इलाज करने के लिए आपको ऑक्सीजन, दवाई और टीकाकरण की आवश्यकता होती है। इस दौरान हमारे पास कुछ भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि देश में ऑक्सीजन की कमी नहीं है, लेकिन ऑक्सीजन की कमी से मरीज मर रहे हैं। न्यायपालिका या कार्यपालिका? मुझे नहीं पता कि यह देश कौन चला रहा है। पिछले 14 महीनों में सरकार क्या कर रही थी?

कोरोना की पहली लहर से भी किसी ने कोई सबक नहीं लिया

डॉ. एससीएल गुप्ता ने कहा कि कोरोना की पहली लहर से भी किसी ने कोई सबक नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अस्थायी अस्पताल कोई विकल्प नहीं हैं। सरकार वहां ऑक्सीजन भेज रही है, लेकिन बड़े अस्पतालों में नहीं भेज रही। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई कि हमें पर्याप्त ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए।

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लोग अपने दरवाजे पर ऑक्सीजन की आपूर्ति क्यों नहीं पा सकते हैं?

विशेषज्ञों ने कहना है कि छोटे नर्सिंग होम और क्लीनिक में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पड़ी है, डाटा तैयार करना होगा। आवश्यक अस्पतालों की अपनी कैप्टिव ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता होनी चाहिए, लोग अपने दरवाजे पर ऑक्सीजन की आपूर्ति क्यों नहीं पा सकते हैं? ऐसे लोग हॉस्पिटल क्यों जाएं, जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत ही नहीं है?

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