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शशि थरूर को 5 साल के इंतजार के बाद मिला था मौका, कश्मीरी पंडितों के लिए प्राइवेट मेंबर बिल पेश न कर पाने पर छलका दर्द

Private Member’s Bill : संसद में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध के चलते बजट सत्र सुचारु रूप से चल नहीं पाया है। दोनों सदनों में भारत-चीन संबंध और एपस्टीन फाइल को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया है। इस दौरान साझा विपक्ष अपने नेताओं को सदन में बोलने न देने का आरोप लगा रहा है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने हंगामें के चलते एक प्राइवेट मेम्बर बिल पेश न करने पाने को लेकर दुख जताया है।

By Abhimanyu 
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Private Member’s Bill : संसद में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध के चलते बजट सत्र सुचारु रूप से चल नहीं पाया है। दोनों सदनों में भारत-चीन संबंध और एपस्टीन फाइल को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया है। इस दौरान साझा विपक्ष अपने नेताओं को सदन में बोलने न देने का आरोप लगा रहा है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने हंगामें के चलते एक प्राइवेट मेम्बर बिल पेश न करने पाने को लेकर दुख जताया है।

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पूर्व केंद्रीय मंत्री और तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को एक्स पोस्ट में लिखा, “कल संसद में हंगामे की वजह से मुझे कश्मीरी पंडितों के अधिकारों पर एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश करने का मौका नहीं मिला, जिसे मैंने पहली बार 2021 में ड्राफ्ट करके सबमिट किया था! तब अधिकारियों ने इसे सत्रहवीं लोकसभा के बाकी समय के लिए रोक दिया था। मैंने इसे पिछले साल अठारहवीं लोकसभा में फिर से सबमिट किया, और आखिरकार पांच साल बाद कल इसे लिस्ट किया गया। अब इसे और इंतज़ार करना पड़ेगा…”

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बता दें कि प्राइवेट मेंबर बिल (गैर-सरकारी विधेयक) संसद का एक ऐसा सदस्य (सांसद) पेश करता है जो मंत्री नहीं है। यह सरकार की विधायी योजना के बजाय व्यक्तिगत सांसद के विचारों को दर्शाता है और इसे आम तौर पर शुक्रवार को पेश किया जाता है। इसका उद्देश्य किसी विशिष्ट मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करना या नीति में सुधार लाना है।

 

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