अब राजनीतिक गलियारों से लेकर हर जगह इसकी चर्चाएं शुरू हो गयी हैं। कहा जा रहा है कि, एक जाति विशेष के सीएमओ को टारगेट करके उनको हटाने की तैयारी चल रही है। इस पूरे मामले में सत्ता के बेहद करीबी अधिकारी शामिल हैं। यही नहीं, इस खेल में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो स्वास्थ्य विभाग में कुछ भी कराने का दंभ भरते हैं। अगर ऐसा है तो ये सरकार को बदनाम करने की बड़ी साजिश हो सकती है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सीएमओ की ट्रांसफर-पोस्टिंग में चल रहा खेल किसी से छुपा नहीं है। अक्सर CMO की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहता है। लेकिन इस बार मामला कुछ और ही सामने आया है। दरअसल, प्रदेश के कुछ जिलों में तैनात CMO को इसलिए परेशान किया जा रहा है कि वो एक जाति विशेष से हैं और उनको हटाने की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गयी हैं। जल्द ही हम उन जिलों का भी नाम बतायेंगे, जहां के CMO के खिलाफ ये साजिश रची जा रही है।
अब राजनीतिक गलियारों से लेकर हर जगह इसकी चर्चाएं शुरू हो गयी हैं। कहा जा रहा है कि, एक जाति विशेष के सीएमओ को टारगेट करके उनको हटाने की तैयारी चल रही है। इस पूरे मामले में सत्ता के बेहद करीबी अधिकारी शामिल हैं। यही नहीं, इस खेल में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो स्वास्थ्य विभाग में कुछ भी कराने का दंभ भरते हैं। अगर ऐसा है तो ये सरकार को बदनाम करने की बड़ी साजिश हो सकती है।
अगर ये अधिकारी अपने मंसूबे में कामयाब हो जाते हैं तो इससे सरकार की छवि को काफी नुकसान पहुंचेगा। सरकार को ऐसे अधिकारियों और उस रैकेट में शामिल लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई करनी चाहिए। दरअसल, पहले भी प्रदेश में CMO की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सवाल खड़े हो चुके हैं और इसको लेकर विवाद भी पैदा हुआ था। ऐसे में अगर एक विशेष जाति के सीएमओ को उनके पद से हटाया जाता है तो इससे सरकार की छवि को धूमिल होगी।
सूत्रों की माने तो प्रदेश के कई जिलों में ऐसे भी सीएमओ तैनात हैं जो अपने ट्रांसफर को लेकर लगातार पत्र लिख रहे हैं लेकिन उनको पद से नहीं हटाया जा रहा है। जबकि इसके पीछे वो अधिकारी परिवारिक परेशानी समेत अन्य चीजों का हवाला भी दे रहे हैं। वहीं, प्रदेश के कई जिलों तैनात सीएमओ के खिलाफ वहां के जिलाधिकारी डीओ लेटर भी लिख चुके हैं लेकिन इसके बाद भी वो लंबे समय से जमे हुए हैं।
सरकार ले मामले का संज्ञान
जाति विशेष CMO के ट्रांसफर को लेकर रची जा रही साजिश अगर सफल होती है तो इसका व्यापाक असर देखने को मिलेगा और सरकार की छवि पर भी इसका असर पड़ेगा। ऐसे में सरकार को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और जाति विशेष सीएमओ के CMO को चिन्हित कर उन्हें हटवाने का चक्रव्यूह रचने वालों पर शिकंजा कसना चाहिए।