नए वित्तीय वर्ष (FY 2026-27) की शुरुआत के साथ ही आम आदमी और खासकर नौकरीपेशा वर्ग के लिए कई बड़े बदलाव लागू हो जायेंगे। केंद्र सरकार और आयकर विभाग (Income Tax Department) के इन फैसलों का सीधा असर आपकी टेक-होम सैलरी, टैक्स फाइलिंग और निवेश पर पड़ेगा।
नई दिल्ली। नए वित्तीय वर्ष (FY 2026-27) की शुरुआत के साथ ही आम आदमी और खासकर नौकरीपेशा वर्ग के लिए कई बड़े बदलाव लागू हो जायेंगे। केंद्र सरकार और आयकर विभाग (Income Tax Department) के इन फैसलों का सीधा असर आपकी टेक-होम सैलरी, टैक्स फाइलिंग और निवेश पर पड़ेगा।
फॉर्म-16 (Form-16) का दौर खत्म
पिछले कई दशकों से टैक्स फाइलिंग का आधार रहा ‘फॉर्म-16’ अब इतिहास बनकर रह जायेगा। सरकार ने टैक्स प्रक्रिया को पेपरलेस और ऑटोमैटिक बनाने के लिए अब पूरी तरह Annual Information Statement (AIS) और Taxpayer Information Summary (TIS) पर भरोसा करने का फैसला कर लिया है। अब करदाताओं को अपनी कंपनी के सर्टिफिकेट का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा क्युकि पोर्टल पर उपलब्ध डेटा के आधार पर रिटर्न पहले से भरा हुआ ही आ जाएगा।
बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल भत्ते में ऐतिहासिक वृद्धि
महंगाई को देखते हुए सरकार ने दो दशक पुराने अलाउंस लिमिट में बदलाव किया है, ‘Children Education Allowance’ को ₹100 प्रति माह से बढ़ाकर अब ₹1,000 प्रति माह (दो बच्चों तक) कर दिया गया है। हॉस्टल भत्ता जो पहले मात्र ₹300 था, उसे बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह कर दिया गया है। इससे प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को बड़ी टैक्स राहत मिलेगी।
‘न्यू टैक्स रिजीम’ अब डिफॉल्ट और अधिक आकर्षक: अगर आपने निवेश का कोई विकल्प नहीं चुना है, तो आपकी सैलरी पर टैक्स अपने आप ‘न्यू टैक्स रिजीम’ के तहत कटेगा। 1 अप्रैल से इस रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) की सीमा को भी बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है, जिससे मध्यम वर्ग के हाथ में खर्च करने के लिए अधिक पैसा बचेगा।
लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) की सीमा में विस्तार
रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के समय मिलने वाले ‘लीव एनकैशमेंट’ पर टैक्स छूट की सीमा को अब बढ़ा दिया गया है। गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए भी ₹30 लाख तक की छुट्टियों का पैसा पूरी तरह टैक्स-फ्री होगा, जो पहले की तुलना में काफी अधिक है। इसके साथ ही बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजैक्शन में सुरक्षा बढ़ाने के लिए UPI और क्रेडिट कार्ड पेमेंट के नियमों में भी बदलाव किया गया है जिसके चलते अब ₹50,000 से अधिक के ऑनलाइन ट्रांसफर के लिए ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ के साथ-साथ बायोमेट्रिक या फेस-आईडी अनिवार्य होगी।
रिपोर्ट : सुशील कुमार साह