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तालिबान ने पाकिस्तान को दी खुली धमकी, कहा-नींद कर देंगे हराम , कायर दुश्मन के अब हर वार का होगा पूरा हिसाब

पाकिस्तान और अफगानिस्तान (Pakistan and Afghanistan) के बीच तनाव चरम पर है। इसी बीच तालिबान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (Taliban Deputy PM Mullah Abdul Ghani Baradar) ने पाकिस्तान को खुली चेतावनी देते हुए उसे कायर दुश्मन करार दिया।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली: पाकिस्तान और अफगानिस्तान (Pakistan and Afghanistan) के बीच तनाव चरम पर है। इसी बीच तालिबान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (Taliban Deputy PM Mullah Abdul Ghani Baradar) ने पाकिस्तान को खुली चेतावनी देते हुए उसे कायर दुश्मन करार दिया। बरादर ने कहा कि अफगानिस्तान ने अपने रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defense) को निर्देश दिए हैं कि वह ऐसे एडवांस तकनीकी हथियार विकसित करें, जो पड़ोसी देशों और दुनिया की नींद हराम कर दें।

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पाकिस्तान (Pakistan) को चेतावनी मुल्ला बरादर ने पाकिस्तान को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि वह अफगानिस्तान (Afghanistan) की क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर न करे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) के तरफ से बेगुनाह महिलाओं, बच्चों और नागरिकों पर हमला करने का परिणाम गंभीर होगा। बरादर ने यह भी चेताया कि तालिबान की याददाश्त मजबूत है और हमलावरों का हिसाब-किताब अफगानिस्तान (Afghanistan) खुद करेगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान (Afghanistan) सभी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन अगर कोई हमला करता है तो उसका जवाब कड़ा और निर्णायक होगा।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान (Pakistan and Afghanistan)  के बीच यह तनाव पिछले कुछ महीनों से बढ़ रहा है। पाकिस्तान (Pakistan)  ने टीटीपी (Tehrik-e-Taliban Pakistan) से जुड़े मामलों को लेकर अफगानिस्तान (Afghanistan) पर हमला किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने भी कार्रवाई की, जिससे दोनों देशों के बीच लगातार टकराव और तनाव की स्थिति बनी हुई है।

जानें मुल्ला अब्दुल गनी बरादर कौन हैं?

मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (Mullah Abdul Ghani Baradar) तालिबान के सह-संस्थापक और प्रमुख कमांडरों में से एक हैं। उन्हें मुल्ला उमर का भरोसेमंद कमांडर माना जाता है। बरादर का जन्म 1968 में अफगानिस्तान (Afghanistan) के उरुजगान प्रांत के देहरावूद जिले में हुआ था। वे दुर्रानी जनजाति की पोपलजई शाखा से ताल्लुक रखते हैं, जो पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई (Former President Hamid Karzai) की जनजाति भी है। बरादर ने 1980 के दशक में सोवियत संघ (Soviet Union) के खिलाफ अफगान मुजाहिदीन के साथ लड़ाई लड़ी। 1992 में अफगानिस्तान में गृहयुद्ध भड़कने के बाद उन्होंने मुल्ला उमर (Mullah Omar) के साथ कंधार में एक मदरसा स्थापित किया और तालिबान आंदोलन की नींव रखी।

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सैन्य और रणनीतिक अनुभव

बरादर ने अफगानिस्तान में लगभग सभी बड़े युद्धों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र और काबुल में तालिबान की संरचना के शीर्ष कमांडरों के रूप में कार्य किया। इसके अलावा, उन्होंने तालिबान की सैन्य और रणनीतिक योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अफगानिस्तान में कई युद्धों में सक्रिय भागीदारी निभाई।

गृहस्थ और व्यक्तिगत जीवन

बरादर ने अपनी शादी मुल्ला उमर की बहन से की थी। उन्होंने तालिबान में एक सैन्य रणनीतिकार और कमांडर के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्हें 2010 में पाकिस्तान के कराची शहर (Karachi City) में सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया था और 2018 में रिहा किया गया। वर्तमान में वे तालिबान की राजनीतिक और सैन्य नीतियों में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

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