तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति का बड़ा दांव खेल दिया है। शुक्रवार को पार्टी ने अपने हिस्से की सभी 27 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और इस बार उसने साफ कर दिया है कि चुनाव में पूरी ताकत झोंकी जाएगी। सूची में कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि BJP तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है...
Tamil Nadu Assembly Elections: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति का बड़ा दांव खेल दिया है। शुक्रवार को पार्टी ने अपने हिस्से की सभी 27 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और इस बार उसने साफ कर दिया है कि चुनाव में पूरी ताकत झोंकी जाएगी। सूची में कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि BJP तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है।
फिर भी इस पूरी लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वह है के.अन्नामलाई (K. Annamalai) का नाम न होना। पार्टी के मुखर और आक्रामक नेता माने जाने वाले अन्नामलाई का चुनावी मैदान से बाहर रहना राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि खुद अन्नामलाई ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला था और उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को लिखित में सूचित कर दिया था कि वह इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अब उनका पूरा ध्यान गठबंधन के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने पर रहेगा।
उम्मीदवारों की सूची पर नजर डालें तो BJP ने अनुभव और प्रभाव का संतुलन बनाने की कोशिश की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन को अवनाशी से मैदान में उतारा गया है, जबकि पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन को मायलापुर से टिकट दिया गया है। पार्टी की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन को एक बार फिर कोयंबटूर उत्तर से मौका मिला है, वहीं प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन सत्तूर से चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही BJP ने सामाजिक समीकरण साधने के लिए पांच महिलाओं को भी टिकट दिया है, जिससे पार्टी का संदेश साफ है कि वह हर वर्ग को साथ लेकर चलना चाहती है।
भाजपा ने जब से उम्मीदवारों की घोषणा की है तबसे राजनीतिक गलियारों और मीडिया मे एक बात को लेकर खूब हलचल है कि अन्नामलाई का चुनाव न लड़ना सिर्फ व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि गठबंधन की राजनीति का हिस्सा भी हो सकता है। इस बार BJP, AIADMK के नेतृत्व वाले NDA के साथ चुनाव मैदान में है। ऐसे में सहयोगी दल के साथ तालमेल बनाए रखना बेहद जरूरी है। माना जा रहा है कि अन्नामलाई की आक्रामक शैली और AIADMK नेतृत्व पर उनके पुराने बयानों को लेकर सहयोगी दल में असहजता थी, जिसे देखते हुए यह फैसला लिया गया।
इधर, तमिलनाडु को लेकर BJP की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि खुद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मोर्चा संभाल लिया है। चेन्नई में उनकी आज एक अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता शामिल होंगे। इस बैठक का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और NDA के पक्ष में माहौल बनाना है। कुल मिलाकर BJP ने तमिलनाडु में मजबूत शुरुआत कर दी है, लेकिन K. Annamalai का चुनाव न लड़ना इस पूरे चुनाव में चर्चा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति BJP और NDA के लिए कितना फायदा लेकर आती है।