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देश के एससी, एसटी व ओबीसी के प्रति कांग्रेस व भाजपा सरकारों का रवैया उदारवादी रहा: मायावती

मायावती ने एक्स पर लिखा कि, सामाजिक उत्पीड़न की तुलना में राजनीतिक़ उत्पीड़न कुछ भी नहीं। क्या देश के ख़ासकर करोड़ों दलितों व आदिवासियों का जीवन द्वेष व भेदभाव-मुक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का हो पाया है। अगर नहीं तो फिर जाति के आधार पर तोड़े व पछाड़े गए इन वर्गों के बीच आरक्षण का बंटवारा कितना उचित?

By शिव मौर्या 
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लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट के दिए गए फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा, क्या देश के ख़ासकर करोड़ों दलितों व आदिवासियों का जीवन द्वेष व भेदभाव-मुक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का हो पाया है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और भाजपा को घरेते हुए कहा कि, इनकी एससी-एसटी व ओबीसी लेकर इन दोनों दलों का रवैया उदारवादी रहा है सुधारवादी नहीं।

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मायावती ने एक्स पर लिखा कि, सामाजिक उत्पीड़न की तुलना में राजनीतिक़ उत्पीड़न कुछ भी नहीं। क्या देश के ख़ासकर करोड़ों दलितों व आदिवासियों का जीवन द्वेष व भेदभाव-मुक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का हो पाया है। अगर नहीं तो फिर जाति के आधार पर तोड़े व पछाड़े गए इन वर्गों के बीच आरक्षण का बंटवारा कितना उचित?

उन्होंने आगे लिखा कि, देश के एससी, एसटी व ओबीसी बहुजनों के प्रति कांग्रेस व भाजपा दोनों ही पार्टियों/सरकारों का रवैया उदारवादी रहा है सुधारवादी नहीं। वे इनके सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति के पक्षधर नहीं वरना इन लोगों के आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में डालकर इसकी सुरक्षा जरूर की गयी होती।

 

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